
प्रेम, विश्वास और कानून-तीनों हार गए, एक मां की जान चली गई (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Woman Shot Dead by Husband Inside Police Station in Hardoi: यह महज एक हत्या नहीं थी, यह उस भरोसे की मौत थी जो एक महिला ने रिश्तों, समाज और कानून पर किया था। हरदोई के पाली थाने में सोमवार सुबह जो हुआ, उसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर भी गहरे सवाल छोड़ दिए। जिस थाने को सुरक्षा का सबसे मजबूत किला माना जाता है, वहीं एक पति ने अपनी पत्नी को गोली मार दी और पुलिस कुछ पल तक बस देखती रह गई।
सोनी (30) और अनूप (38) की शादी को करीब 17 साल हो चुके थे। एक बेटा था,12 साल का, जो शायद यह भी नहीं समझ पाएगा कि उसके माता-पिता के बीच क्या हुआ और उसकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी। समय के साथ रिश्तों में दरार आई। घरेलू कलह बढ़ती गई। इन्हीं उलझनों के बीच सोनी पांच दिन पहले शाहजहांपुर निवासी सुरजीत के साथ घर छोड़कर चली गई। यह कदम गलत था या हालात की मजबूरी,यह जांच का विषय है। लेकिन यह तय है कि यह फैसला उसकी जिंदगी की आखिरी कड़ी बन गया।
पति अनूप ने 8 जनवरी को थाने में शिकायत दी। पुलिस ने तलाश शुरू की और रविवार को सोनी को प्रेमी के साथ बरामद कर लिया। उसे पाली थाने लाया गया। सोमवार को उसका मेडिकल होना था। सोनी शायद यह सोचकर राहत महसूस कर रही होगी कि अब वह थाने में है,जहां वह सुरक्षित है। लेकिन उसे क्या पता था कि यही जगह उसकी आखिरी सांसों की गवाह बनेगी।
सोमवार सुबह करीब 10:45 बजे। सोनी थाने की मेस से खाना खाकर बाहर निकली। आसपास पुलिसकर्मी थे, रिश्तेदार भी मौजूद थे। माहौल सामान्य था। तभी पति अनूप वहां पहुंचा। किसी को अंदेशा नहीं था कि उसकी कमर में मौत छिपी है।
अचानक उसने तमंचा निकाला और सोनी के दाहिने कंधे में गोली मार दी। गोली सीने से आर-पार हो गई। एक पल में सब कुछ खत्म हो गया। सोनी जमीन पर गिर पड़ी-खून से लथपथ।
गोली की आवाज से थाने में अफरा-तफरी मच गई। कुछ पुलिसकर्मी घबरा गए। कुछ सेकंड ऐसे थे, जिनमें कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। यह वही पुलिस थी, जिसके भरोसे सोनी थाने में बैठी थी। आरोपी भागने लगा, तब पुलिस ने दौड़ाकर उसे पकड़ लिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
सोनी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कोशिश की, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव ने सब खत्म कर दिया। थोड़ी देर बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। एक मां, एक पत्नी, एक बेटी-सब कुछ खत्म हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही एसपी हरदोई अशोक कुमार मीणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने लापरवाही को गंभीर मानते हुए इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर दरोगा विक्रांत और महिला सिपाही संजना राजपूत को तत्काल निलंबित कर दिया। जांच अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) को सौंप दी गई।
इस पूरी घटना का सबसे बड़ा पीड़ित वह 12 साल का बच्चा है, जिसने अपनी मां को खो दिया और अपने पिता को जेल जाते देखा। उसका भविष्य अब सवालों से भरा है,मेरी मां को थाने में क्यों मारा गया। पुलिस क्या करती रही,इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं। पाली थाने में हुई यह हत्या सिस्टम की सामूहिक विफलता है। यह घटना बताती है कि सिर्फ कानून होना काफी नहीं, उसका सही पालन और संवेदनशीलता भी जरूरी है। महिला अगर थाने में भी सुरक्षित नहीं है, तो समाज को आत्ममंथन करना होगा।
Updated on:
12 Jan 2026 03:59 pm
Published on:
12 Jan 2026 03:51 pm

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