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April Fool: काका हाथरसी के कल्पनाओं का मूर्खिस्तान, ऐसा था मूर्खों का शासन

April Fool: अप्रैल फूल-डे अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह से मनाकर सेलिब्रेट किया जाता है। पर क्या आप जानते हैं यूपी के हास्य व्यंग्य के कवि काका हाथरसी ने एक मूर्खिस्तान की भी कल्पना की थी। उन्होंने अपने कविता से मूर्खों का शासन कैसा होगा?

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हाथरस

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Aman Pandey

Apr 01, 2023

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काका हाथरसी की कविता ''मिटा देंगे सबका नामो-निशान, बना रहे नया राष्ट्र मूर्खिस्तान'' में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि मूर्खिस्तान का राष्ट्रपति कौन होगा, इसकी क्या भाषा होगी। मूर्खिस्तान का झंडा कैसा होगा और मूर्खिस्तान का राष्ट्रीय पशु और पक्षी कौन होगा। वर्तमान में देश की राजनीति की जो दशा है, उस पर काका ने कविता के माध्यम से सटीक व्यंग्य कसे हैं।

काका ने अपने कविता में बताया है क‌ि हमारे मूर्खिस्तान के राष्ट्रपति तानाशाह ढपोलशंख होंगे। उनके मंत्री (यानी चमचे) खट्टा सिंह, लट्ठा सिंह, खाऊ लाल, झपट्टा सिंह और रक्षामंत्री मेजर जनरल मच्छर सिंह होंगे। उनकी राष्ट्रभाषा हिंदी ही रहेगी, लेकिन बोलेंगे अंग्रेजी। अक्षरों की टांगें ऊपर होंगी और सिर नीचे, तमाम भाषाएं दौड़ेंगी हमारे पीछे-पीछे।

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ये था मूर्खिस्तान का राष्ट्रपशु
काका ने इस कविता में आगे लिखा है कि मूर्खिस्तान का राष्ट्रपशु ***** होगा। राष्ट्रीय पक्षी उल्लू या कौआ, राष्ट्रीय खेल कबड्डी या कनकौआ। राष्ट्रीय गान मूर्ख चालीसा, राजधानी के लिए शिकारपुर, वंडरफुल। राष्ट्रीय दिवस होगी की आग लगी पडवा।


सम्मेलन में होती थी पूजा गधे की पूजा
एक अप्रैल को मूर्ख दिवस पर काका हाथरसी महामूर्ख सम्मेलन कराते थे। बुजुर्गों के अनुसार, मूर्ख दिवस कार्यक्रम प्रथम बार 1 अप्रैल 1959 को काका हाथरसी ने हाथरस में कराया था। सेढ़ू लाला यानी गधे को मंच पर लाकर उसकी पूजा की गई थी। शहर के विभिन्न नामी नागरिकों को उपाधियां भी वितरित हुई थीं। वहां मौजूद लोगों को मूर्ख रत्न, मूर्खश्री, मूर्खभूषण जैसी उपाधियों से सम्मानित किया जाता था।

अप्रैल फूल डे मनाने के ये हैं कारण
यूं तो अप्रैल फूल डे मनाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन एक कहानी के अनुसार, इसकी शुरुआत सबसे पहले साल 1381 में हुई थी। उस समय के राजा रिचर्ड जीती और बोहेमिया की रानी एनी ने लोगों के सामने यह घोषणा की थी कि वह 32 मार्च साल 1381 को सगाई करेंगे। लेकिन जब 31 मार्च 1381 का दिन आया, तो लोगों को समझ आया कि 32 मार्च तो होता ही नहीं है। इसके बाद उन्हें समझ आ चुका था कि राजा-रानी ने उन्हें मूर्ख बनाया है। इसके बाद 32 मार्च यानी 1 अप्रैल मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।