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मायावती के निर्देश पर तीन नेता बसपा से निकाले गए, कारण बड़ा अटपटा सा है

पहले अलीगढ़ के पूर्व विधायक जमीरउल्ला खां को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निकाला गया था।
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Mayawati

मायावती

हाथरस। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। पहले अलीगढ़ के पूर्व विधायक जमीरउल्ला खां को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निकाला गया था। अब आगरा-अलीगढ़ जोन के मुख्य जोन इंचार्ज हेमंत प्रताप सिंह को अनुशासनहीनता में पदमुक्त किया गया है। साथ ही बसपा के तीन अन्य नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इन पर आरोप है कि उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य का स्वागत किया था। बता दें कि बेबीरानी मौर्य का संबंध भारतीय जनता पार्टी से है।

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इन्हें निकाला गया
गत दिवस बहुजन समाज पार्टी के मंडल कार्यालय कालिंदी विहार, आगरा में समीक्षा बैठक हुई। उत्तराखंड एवं आगरा-अलीगढ़ के जोनल कोर्डिनेटर सुनील चित्तौड़ ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष मायावती ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अनुशासनहीनता करने वाले पदाधिकारियों को पार्टी से निकाल दिया जाए। इसी के चलते हाथरस के मंडल जोन इंचार्ज लल्लन बाबू, हाथरस के जिला महासचिव जेपी सागर और जिला प्रभारी आरपी गोला को पार्टी से निकाल दिया गया है। तीनों नेताओं ने हाथरस में उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य का स्वागत किया था। तभी तय माना जा रहा था कि पार्टी कार्रवाई करेगी।

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बसपा की माया

अब लोकसभा चुनाव आ रहे हैं। ऐसे में पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि गैर बसपाइयों के साथ रहने वाले कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। साफ-साफ कहा गया कि वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देश का अनुपालन न करने वाले बसपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वैसे भी बसपा में कब किसको निकाल दिया जाए, किसे पदमुक्त कर दिया जाए और किसे पदाधिकारी बना दिया जाए, कोई नहीं जानता है।

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पूर्व विधायक को क्यों निकाला

अलीगढ़ से समाजवादी पार्टी के दो बार विधायक रहे हैं जमीर उल्ल खां। वे विधानसभा चुनाव से पूर्व बहुजन समाज पार्टी में आए थे। उन्हें भी पार्टी से निकाल दिया गया। उन पर आरोप है कि वे लगातार अखबारों में बयानबाजी कर रहे थे। मना करने के बाद भी नहीं मान रहे थे। इसे ही अनुशासनहीनता माना गया। बसपा में बड़े पदाधिकारी भी स्वयं कोई बयान नहीं दे सकते हैं। उन्हें इसके लिए बसपा अध्यक्ष मायावती से अनुमति लेनी होती है। यही कारण है कि बसपा नेता मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं।

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