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GST की वजह से बेरंग हुए होली के रंग, फीका पड़ा कारोबार

देशभर में हाथरस के रंगों की मांग रहती है, लेकिन इस बार जीएसटी के चलते ये कारोबार फीका दिखाई दे रहा है।

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हाथरस

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Mukesh Kumar

Feb 25, 2018

जीएसटी इम्पैक्ट

हाथरस। ब्रज की होली और रंगों के लिए हाथरस शहर का नाम देशभर मशहूर है। यहां रंग और गुलाल बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है। ये कुटीर उद्योग के रूप में फैला हुआ है। अव्वल क्वालिटी की वजह से देशभर में हाथरस के रंगों की मांग रहती है, लेकिन इस बार जीएसटी के चलते यहां रंग कारोबार फीका दिखाई दे रहा है। जिससे कारोबारी चिंतित हैं।


रंगों पर 18 प्रतिशत जीएसटी
रंग कारोबारी प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि पहले रंग पर पांच प्रतिशत का टैक्स होता था। जिसके कारण सही दामों में रंग देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता था, लेकिन अब 15 फीसद जीएसटी लग रहा है। इस कारण रंग, गुलाल व अन्य 10 से 15 प्रतिशत महंगा हो गया है। जिसकी वजह से रंगों का कारोबार पिछली बार की अपेक्षा कम हुआ है। उन्होंने बताया कि रंग कारोबारियों ने जीएसटी काउंसिल से दर को कम किये जाने की मांग की है।


अच्छी क्वालिटी का बनता है रंग
प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि हाथरस रंग-गुलाल उत्पादन की सबसे बड़ी मंडी है। यहां बड़े पैमाने पर होली के रंग बनाए जाते हैं। शहर में रंग बनाने की कई फैक्ट्रियां भी हैं, जो लोगों के रोजगार का जरिया बनी हुई हैं। कारोबारियों की माने तो यहां के रंगों की क्वालिटी बेहतर है। गुलाल, अरारोट और स्टार्च से बनाने की वजह से रंग हानिकारक नहीं होते हैं। जिससे हाथरस के रंगों को मांग देशभर में है।


जीएसटी की वजह से मंदी
होली का त्योहार आते ही हाथरस में रंगों का कारोबार आसमान छूने लगता है, लेकिन जीएसटी की वजह से मंदी है। क्योंकि टैक्स ज्यादा लगने पर व्यापारियों को महंगा पड़ रहा है। रंग कारोबारियों का कहना है कि रंग बनाने का काम काफी पुराना है। कुटीर उद्योग के रूप में फैला हुआ है। अगर सरकार सब्सिडी दे तो ये कारोबार और भी बढ़ सकता है।