
praveen varshney
हाथरस। जिले के रहने वाले प्रवीण वार्ष्णेय के साथ वर्ष 2009 में एक ऐसा वाक्या हुआ जिसने उन्हें अंदर से झकझोर कर रख दिया। उनके परिवार के एक शख्स की तबियत काफी खराब हो गई थी। उसे ब्लड की जरूरत थी। ब्लड के लिए वे शहरभर में कई जगह दौड़े, लेकिन कहीं से इंतजाम नहीं हो सका। उसके बाद उन्होंने आगरा और दिल्ली तक खून के लिए संपर्क किया। तब जाकर किसी तरह इंतजाम हुआ और उनकी जान बच पायी। उस दिन प्रवीण ने ठान लिया कि अब वे जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए कुछ ऐसा काम करेंगे जिसके कारण लोगों को खून की कमी के चलते किसी व्यक्ति को जान नहीं गंवानी पड़ेगी। उसके बाद उन्होंने शहर में जगह जगह कैंप लगाकर ब्लड बैंक तैयार किया ताकि जरूरतमंदों को ब्लड के लिए इधर उधर न भटकना पड़े।
2010 से शुरू की मुहिम
प्रवीण वार्ष्णेय ने 2010 में रक्तदान कैंप लगाने की योजना बनाई। उसके बाद इसकी चर्चा अपने साथियों से की और रक्तदान शिविर की शुरुआत की। उनका कहना है कि उनकी रक्तदान शिविर की मुहिम जिले से शुरू हुई थी लेकिन अब देशभर में चल रही है। अकेले हाथरस शहर में ही वे अब तक करीब 25 रक्तदान के कैंम्प का आयोजन करा चुके हैं। वे खुद भी करीब 30 बार रक्तदान कर चुके हैं। यहां तक कि 29 मई 2010 को जब बागला जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक की स्थापना हुई, तो उसमें भी पहले रक्तदाता के रूप में प्रवीण वार्ष्णेय ने अपना नाम दर्ज कराया और रक्तदान किया।
सोशल मीडिया पर भी मदद के लिए रहते हैं तैयार
प्रवीण ने व्हाट्सएप पर भी तमाम ऐसे ग्रुप बना रखे हैं जिन पर रक्त की आवश्यकता की सूचना दी जा सकती है। जो भी व्यक्ति उन ग्रुप पर ब्लड की जरूरत का पोस्ट डालता है, उससे फौरन उस शहर की टीम संपर्क करके उसे ब्लड की आपूर्ति कराती है।
Published on:
01 Jun 2018 11:06 am
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