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हाथरस। यूपी पुलिस के कारनामें आए दिन सामने आते रहते हैं। इसी कड़ी में एक नया कारनामा हाथरस पुलिस का सामने आया है। दरअसल एक सात साल का लड़का रास्ता भटक गया था। पुलिस को वो हाथरस में मिला तो पुलिस ने उसे जनरल डायरी यानी जीडी में लड़के की जगह लड़की दर्शा दिया। इसके बाद बाल गृह समिति ने भी उसे बालिका दर्शाते हुए बाल गृह रखने का आदेश दे दिया। चार दिन पहले जब बच्चे की बुजुर्ग नानी उसे लेने के लिए आयीं तो आदेश में बालिका दर्ज होने के कारण बच्चे को उनके सुपुर्द करने से इंकार कर दिया। बाद में इस मामले में यूपी पुलिस, डीआईजी अलीगढ़ और हाथरस पुलिस को ट्वीट किया गया। इसके बाद मामला अधिकारियों की जानकारी में आया और भूल सुधार कर बालक को उसकी नानी के सुपुर्द किया गया।
ये था पूरा मामला
रास्ता भटके सात साल के इस बच्चे का नाम दायमतीन हैं। इसके पिता अकरम दिव्यांग हैं जो बदायूं में रहते हैं। मां का इंतकाल हो चुका है। लिहाजा उसकी नानी खुशमीदा उसे अपने घर पर रखकर उसका पालन पोषण कर रही हैं। 28 सितंबर को बालक अपने घर से रास्ता भटक गया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत दर्ज नहीं की। शाम को दायमतीन हाथरस के मुरसान चौराहे पर पुलिस को मिला। इसके बाद पुलिस उसे थाने ले आयी। सादाबाद थाने में जीडी में दर्ज करते हुए पुलिस ने बालक को बालिका दर्शा दिया। इसके बाद हाथरस बाल कल्याण समिति ने उसे बालिका दिखाते हुए ही आगरा के बाल गृह में भेज दिया।
जब दायमतीन की नानी को उसके बाल गृह में होने की सूचना मिली तो वे बुधवार को उसे लेने के लिए पहुंची। आदेश में बालिका लिखा होने के कारण दायमतीन को उसकी नानी के सुपुर्द करने के लिए मना कर दिया गया। इसके बाद परिजन महफूज संस्था पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समन्वयक नरेश पारस से मिले। नरेश पारस ने यूपी पुलिस, डीआईजी अलीगढ़ और हाथरस पुलिस को ट्वीट किया। तब मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया और भूल में सुधार कर बालक को उसकी नानी के सुपुर्द किया गया।
Published on:
06 Oct 2018 11:41 am
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