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देखें तस्वीरें : इन 3 रोटियों से करें ब्लड शुगर को कंट्रोल, हर दिन बदल-बदल कर खाएं, कभी नहीं बढ़ेगी शुगर

डायबिटीज, जिसे आमतौर पर मधुमेह कहा जाता है, खराब खानपान और अनैतिक जीवनशैली के कारण हो सकती है। यदि डायबिटीज के मरीज अपने खानपान में सुधार नहीं करते हैं, तो इससे उनके शरीर में ब्लड शुगर लेवल में वृद्धि हो सकती है, जिससे कई और समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज अभी तक नहीं है, लेकिन इस गंभीर बीमारी को लाइफस्टाइल और सही खानपान के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

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डायबिटीज, जिसे आमतौर पर मधुमेह कहा जाता है, खराब खानपान और अनैतिक जीवनशैली के कारण हो सकती है। यदि डायबिटीज के मरीज अपने खानपान में सुधार नहीं करते हैं, तो इससे उनके शरीर में ब्लड शुगर लेवल में वृद्धि हो सकती है, जिससे कई और समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज अभी तक नहीं है, लेकिन इस गंभीर बीमारी को लाइफस्टाइल और सही खानपान के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

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रागी का आटा रागी आटा, जिसे मंडुआ भी कहा जाता है, एक सुपरफूड के रूप में माना जाता है जो सेहत के लाभों से भरपूर है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के अनेक क्षेत्रों में पौष्टिक भोजन का हिस्सा बनता है, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां इसे खाने के विभिन्न स्वादिष्ट और पौष्टिक रूपों में तैयार किया जाता है। रागी में कैल्शियम, आयरन, फाइबर, और प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है, जिससे यह एक समृद्धि से भरा हुआ आहार प्रदान करता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए रागी के आटे का इस्तेमाल विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है और शरीर के ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। रागी के आटे से बने विभिन्न विरुद्धाभासी आहार विकल्प जैसे कि रोटी, डोसा, चीला, और लड्डू, न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि इन्हें समर्पित करके एक स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में कदम बढ़ाना भी संभव है।

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जौ का आटा जौ का आटा, एक स्वस्थ आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो डायबिटीज के रोगियों के लिए विशेष रूप से सुझाया जाता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले आटों की तुलना में, जौ का आटा उनके लिए एक साकारात्मक विकल्प हो सकता है जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। जौ में मौजूद विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, और प्रोटीन से भरपूर होता है, जिससे रोगियों को आवश्यक पोषण प्रदान होता है। जौ के आटे में फाइबर की भरपूर मात्रा होने से इंसान का पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे भूख कम लगती है और वजन कंट्रोल में मदद मिलती है। इसके अलावा, जौ के आटे का सेवन विभिन्न स्वादिष्ट रेसिपीज़ में उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि रोटी, दोसा, और लड्डू, जो स्वास्थ्य को संजीवनी बूति प्रदान कर सकते हैं।