वेंटिलेटर से ठीक हो चुके कोरोना मरीज एक माह तक इन बातों का रखें ध्यान

कोविड-19 के गंभीर मरीज पहले की तुलना में दस गुना अधिक स्वस्थ हो रहे हैं। वेंटिलेटर पर जाने वाले पहले केवल 5त्न कोरोना मरीज ही जिंदा बच पाते थे लेकिन अब यह आंकड़ा 50% अधिक हो गया है।

By: Hemant Pandey

Published: 07 Nov 2020, 06:23 PM IST

कोविड-19 के गंभीर मरीज पहले की तुलना में दस गुना अधिक स्वस्थ हो रहे हैं। वेंटिलेटर पर जाने वाले पहले केवल 5त्न कोरोना मरीज ही जिंदा बच पाते थे लेकिन अब यह आंकड़ा 50% से अधिक हो गया है। आंकड़े देखें तो एक हजार में से केवल तीन कोविड मरीजों को वेंटिलेटर पर जाने का खतरा रहता है।
क्रॉनिक डिजीज वालों को रहता है खतरा
कोविड के मरीजों में जिनको पहले से कोई क्रॉनिक डिजीज जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, लिवर या किडनी डिजीज, फेफड़ों से जुड़ी कोई बीमारी जैसे अस्थमा, सीओपीडी, एड्स या फिर कैंसर आदि रोग हैं तो उनको वेंटिलेटर पर जाने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मरीजों में बीमारी या फिर कुछ दवाइयों से इम्युनिटी का स्तर कम होने से यह आंशका अधिक रहती है।
70-80त्न ऑक्सीजन होने के बाद वेंटिलेटर...
जब ऑक्सीजन लेवल 70-80त्न होने, सांस लेने में दिक्कत, बीपी घट जाए और शरीर में कार्बन-डाई-ऑक्साइड का स्तर बढऩे से मस्तिष्क पर असर होने से बेहोशी छाने लगे तो ही वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। सामान्य व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल 94-99त्न तक होता है जबकि कोविड के मरीजों में ऑक्सीजन 90त्न से कम होता है तो उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है।
इस तरह होती है रिकवरी
कोविड-19 के कारण फेफड़े क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। वेंटिलेटर सपोर्ट से मरीज को चार मुख्य लाभ मिलते हैं। मरीज के फेफड़ों को आराम मिलता, खून में ऑक्सीजन का स्तर बढऩे से बेहोशी दूर होती, फेफड़ों के छोटे-छोटे कोष्ठक (एल्बूलाइड ) खुलने से खून का प्रवाह बढ़ता और कार्बन डाई-ऑक्साइड का स्तर ïघटता है।
कृत्रिम सांस देने का तरीका
वेंटिलेटर वाले मरीजों को नाक और मुंह या फिर कई बार गले में छेद (ट्रैकिया) कर कृत्रिम तरीके से ऑक्सीजन दिया जाता है। वेंटिलेटर से पहले भी कुछ मरीजों को बाइपैप से लाभ मिलता है। बाइपैप में मरीज के नाक और मुंह के पास ऑक्सीजन दिया जाता है। मरीज सामान्य तरीके से सांस लेता है तो अंदर जाती है। इससे मरीज की परेशानी कम होती है।
सुबह-शाम सांस से जुड़े व्यायाम करें
वेंटिलेटर सपोर्ट से ठीक होने के बाद भी करीब 10त्न मरीजों में दोबारा स्थिति गंभीर होने की आंशका रहती है। ऐसे मरीज ठीक होने के एक माह बाद तक सावधानी बरतें। दिन में 4-5 बार पल्सऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर नापें, हाई प्रोटीन डाइट लें। सांस से जुड़े व्यायाम और चेस्ट फिजियोथैरेपी करें। कुछ गंभीर मरीजों में नुकसान की भरपाई के लिए रिहैबिलिटेशन भी करते हैं।
अगर ये लक्षण दिखें तो तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क करें
ठीक होने के बाद भी ऑक्सीजन का स्तर 94त्न से कम हो रहा, बुखार 99-100 फेरनहाइट से अधिक, सांस लेने में तकलीफ या बीपी कम हो, थकान या फिर मांसपेशियों में तेज दर्द हो रहा है तो तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क करें। देरी करने से मरीज की स्थिति गंभीर भी हो सकती है। दोबारा वेंटिलेटर पर जाने पर स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर हो सकती है।

Hemant Pandey
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