
AIDS in Tripura : त्रिपुरा में एचआईवी/एड्स की स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) के ताजे आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर साल एड्स के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के विभिन्न एड्स सेंटरों में 828 छात्रों का पंजीकरण किया गया, जिनमें से अधिकांश को मुफ्त एंटी-रेट्रोवायरल उपचार दिया जा रहा था। मई 2024 और 2007 के बीच, इनमें से 47 छात्रों मौत हो चुकी है । 2023-2024 में 44 मौतों और 1790 नए मामलों ने त्रिपुरा में एचआईवी/एड्स की गंभीरता को और उजागर कर दिया है।

AIDS in Tripura : हाल ही में TSACS ने 220 स्कूलों और 24 कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के छात्रों की पहचान की है जो इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स का सेवन कर रहे थे। यह चिंताजनक स्थिति समाज और शिक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा है। युवाओं में नशीले पदार्थों की लत का बढ़ता हुआ प्रभाव उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, जो भविष्य की पीढ़ी के विकास और सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है।

TSACS की रिपोर्ट में पाया गया है कि इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वाले छात्रों में से अधिकांश अमीर परिवारों से हैं, जिनमें से कई एचआईवी पॉजिटिव हैं। ये वे परिवार हैं जहां माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी में हैं और बच्चों की हर मांग तुरंत पूरी करते हैं। इस प्रवृत्ति से यह स्पष्ट होता है कि समृद्धि और सुविधा के बावजूद, बच्चों में नशे की लत एक गंभीर समस्या बन रही है, जो उनके स्वास्थ्य और भविष्य को खतरे में डाल रही है।

एक ही सिरिंज का इस्तेमाल करने से एचआईवी तेजी से फैल सकता है। TSACS की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ड्रग्स लेने वाले अधिकांश लोग एक ही सिरिंज का प्रयोग करते हैं, जिससे खून के संपर्क में आने से वायरस फैलता है। यह खतरनाक प्रथा न केवल नशे की लत को बढ़ावा देती है, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है, जिससे समाज में जागरूकता और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

सुइयों, सिरिंज या अन्य इंजेक्शन उपकरण का साझा उपयोग एचआईवी संचरण की संभावना को तेजी से बढ़ा देता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एचआईवी वायरस खून में शरीर के बाहर भी जीवित रह सकता है। TSACS की रिपोर्ट में बताया गया है कि ड्रग्स लेने वाले लोग अक्सर एक ही सिरिंज का उपयोग करते हैं, जिससे वायरस तेजी से फैलता है। इस खतरनाक प्रथा के कारण युवाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं, जिससे जागरूकता और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

एचआईवी संक्रमण के लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, चेहरे और धड़ पर दाने, दस्त, वजन कम होना और लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हैं। एड्स के विकसित होने पर, रोगी को बार-बार संक्रमण जैसे निमोनिया, तपेदिक, असामान्य थकान, रात में पसीना आना, बुखार और मुंह में घाव का सामना करना पड़ता है। ये लक्षण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने का संकेत हैं, जो तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता होती है।