
ओम के उच्चारण के बारे में ये भी जानें
इसके उच्चारण से न केवल हम अच्छा महसूस करते हैं बल्कि शारीरिक, मानसिक और दिमागी स्तर पर भी इसका लाभ मिलता है। नियमित करने से व्यक्ति संपूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है। जानते हैं ब्रह्म नाद के बारे में विस्तार से-
ऐसे करें उच्चारण
ओम का उच्चारण कई तरह से किया जाता है। लेकिन सामान्य रूप से गहराई से सांस लें और पूरी सांस निकलने तक उच्चारण करें। इसे कई बार जल्दी-जल्दी भी उच्चारण कर सकते हैं तब आसपास कोई दूसरी आवाज नहीं होती है। इससे हम सीधे जुड़ते हैं। मन नियंत्रित होता है। बाहर से जुड़ाव अलग हो जाता है।
अभ्यास कब करें
भ्रामरी प्राणायाम या ब्रह्म नाद सुबह सूर्योदय के समय शांत जगह पर बैठकर करना चाहिए। बैठना का तरीका सुखासन हो तो ज्यादा अच्छा रहता है। उच्चारण रोजाना कम से कम 108 बार करें। 40 मिनट तक कर सकते हैं।
घबराहट हो तो रोक दें
इसके उच्चारण के समय अगर घबराहट या सही उच्चारण न हो तो रोक दें। फिर थोड़ी देर आंखों को बंद कर गहरी सांस लें और छोड़ें। इसके बाद से उच्चारण शुरू करें।
किसे नहीं करना चाहिए
हाल ही कोई सर्जरी हुई है। गर्भावस्था व माहवारी के दौरान नहीं करें। जिनका ब्लड प्रेशर अधिक और हाल ही हार्ट अटैक आया हो। बुखार, न्यूमोनिया या फेफड़ों की बीमारी, कीमोथैरेपी या फिर दिमागी बीमारी का इलाज चल रहा है तो इसे करने से बचें।
Published on:
06 Mar 2020 03:00 pm
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