
AYURVEDA: यूरिक एसिड बढऩे पर घर बनाकर खाएं चतुर चूर्ण,AYURVEDA: यूरिक एसिड बढऩे पर घर बनाकर खाएं चतुर चूर्ण,AYURVEDA: यूरिक एसिड बढऩे पर घर बनाकर खाएं चतुर चूर्ण
आयुर्वेद में यूरिक एसिड को वात रक्त विकार कहते हैं। यह समस्या उनमें अधिक होती है जो लवण और कटु चीजें ज्यादा खाते हैं जैसे नमक, उड़द-कुल्थी की दालें, गन्ना और उससे बने उत्पाद, दही, लस्सी, अचार, पापड़, मसालों और खट्टी चीजों के साथ नॉनवेज ज्यादा खाते हैं। जल्दी-जल्दी खाना खाने, ज्यादा क्रोध करने और दिन में सोने से यह समस्या बढ़ती है। बचाव के लिए सुबह जल्दी उठें और उठते ही पानी पीएं। यह शरीर को डिटॉक्स करता है। यूरिक एसिड की समस्या नहीं होती है। मंूग, मसूर, अरहर दाल, संतरा, पपीता, मुन्नका, ताजा दूध, चौलाई, अदरक, परवल, मकोई, लहसुन, प्याज, आंवला खाएं। इसके अलावा चातूर चूर्ण लेना फायदेमंद होता है। इसमें मेथी, कलौंजी, चतरचूर्ण (आलू के बीज) और अजवाइन को 50-50 ग्राम की मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। सुबह-शाम खाली पेट गुनगुने पानी से एक-एक चम्मच लें। इससे यूरिक एसिड कम होता है। साथ में वायु रोग ठीक होते हैं। पेट की समस्या में भी आराम मिलेगा।
Published on:
20 Apr 2021 08:20 pm
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