
आयुर्वेद में प्रकृति के अनेक उपहारों का उपयोग रोगों को दूर करने और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए किया जाता है। इनमें से पेड़ों की छाल भी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। आज हम तीन ऐसे पेड़ों की छाल की बात करेंगे जो आयुर्वेद में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं - बबूल, नीम और अर्जुन। इन तीनों की छाल के अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं, जिनके बारे में विस्तार से जानना आवश्यक है।

नीम की छाल (Neem bark)नीम की छाल को औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-वायरल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-पैरासिटिक गुण पाए जाते हैं। इसके मुख्य लाभों में शामिल हैं: त्वचा संबंधी रोगों का उपचार: नीम की छाल का उपयोग फोड़े, फुंसी, एक्जिमा, सोरायसिस और अन्य त्वचा संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता है।बालों की समस्याओं का समाधान: नीम की छाल का पेस्ट बालों में लगाने से डैंड्रफ, खुजली और अन्य बालों की समस्याओं से छुटकारा मिलता है।मलेरिया का उपचार: नीम की छाल का काढ़ा मलेरिया के बुखार को कम करने में सहायक होता है।पाचन क्रिया में सुधार: नीम की छाल का सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त करने और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।डायबिटीज का नियंत्रण: नीम की छाल का सेवन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

अर्जुन की छाल (Arjuna bark)अर्जुन की छाल औषधीय गुणों से भरपूर है। इसका सबसे अधिक उपयोग काढ़ा बनाने में किया जाता है। इसके काढ़े में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होता है। यह डायबिटीज, इंफेक्शन, संक्रमण, गले की खराश, सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियों से राहत दिलाने में कारगर है इसके मुख्य लाभों में शामिल हैं: हृदय रोगों का उपचार: अर्जुन की छाल का सेवन हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, हृदय की धड़कन को नियमित करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है।कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करना: अर्जुन की छाल का सेवन रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक होता है। बवासीर का इलाज: अर्जुन की छाल का इस्तेमाल बवासीर के इलाज के लिए भी किया जाता है। इसकी छाल का लेप बवासीर के मस्सों पर लगाने से दर्द और सूजन कम होती है।