
शरीर में अक्सर जोड़ों के दर्द पर ही ध्यान दिया जाता है। शरीर में अन्य स्थानों की हड्डियों पर होने वाले दर्द को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन इस दर्द को नजरअंदाज करना आपके लिए घातक हो सकता है। क्योेकि इन हड्डियों में कैंसर भी हो सकता है।
सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है
हड्डियों का दर्द, खिंचा-खिंचा महसूस होना और एक या एक से अधिक हड्डियों में दर्द महसूस होना घातक बीमारी के लक्षण हैं। सीनियर ज्वांइट रिपलेसमेंट सर्जन डॉ धीरज दुबे कर का कहना है कि हड्डी औऱ जोड़ों का दर्द से जुड़ी कुछ समस्याओं से निजात पाने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
मेटास्टासाइजेज भी बड़ी वजह
दुबे का कहना है कि हड्डियों का दर्द, जोड़ों के दर्द की तुलना में कम पाया जाता है। हड्डियां टूटने के साथ ही हड्डियों तक कैंसर फेल जाने यानि मेटास्टासाइजेज भी बड़ी वजह हो सकता है। अगर दर्द के कारणों की बात करें तो जोड़ों का दर्द चोट के साथ ही अर्थराइटिस, ऑस्टियोअर्थाराइटिस, रयूमेटॉयड अर्थाराइटिस, एसेप्टिकनेक्रोसिस,बर्साइटिस, ऑस्टियोकोंड्राइटिस, सिकलसेल रोग(सिकल सेल एनीमिया) से भी होता है।
ये प्रमुख कारण
हड्डियों का दर्द चोट या फिर अन्य कारणों से हो सकता है। इसमें बोन कैंसर(प्राथमिक मैलिग्नेंसी),मेटास्टेटिक मैलिग्नेंसी, हड्डियों को रक्त की आपूर्ति में अवरोध हो जाना, हड्डियों में संक्रमण(ऑस्टियोमायलिटिस), ल्यूकेमिया(रक्त कैंसर), हड्डियों में खनिज की कमी(ऑस्टियोपोरोसिस) समेत अन्य प्रमुख कारण हैं।
ये परेशानी तो जांच जरूरी
अगर किसी व्यक्ति को चलने, खड़े होने, हिलने-डुलने और यहां तक कि आराम करते समय भी दर्द, सूजन की दिक्कत हो। गति करते समय जोड़ों का लॉक हो जाना, जोड़ों में कड़ापन रहने पर विशेषज्ञ की सलाह के बाद जांच जरूर करवानी चाहिए।
व्यायाम से भी इलाज संभव
सामान्य हल्के व्यायाम अर्थाराइटिस या फाइब्रोमाइल्जिया के रोगियों में जोड़ों की गतिशीलता बढाने, दर्द घटाने औऱ दुखती कड़ी मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद करते हैं। अगर इन उपायों से राहत नहीं मिले तो डॉक्टर से मिलकर उपचार जरूरी है।
Published on:
24 Jul 2018 04:59 am
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