
DaaL And Dahi (image- gemini AI)
Daal And Dahi: आपने ज्यादातर लोगों को देखा होगा कि वे जब दाल खाते हैं तो उसमें दही मिलाकर खाते हैं। कई लोग दाल के बिना दही नहीं खाते और दही के बिना दाल नहीं खाते हैं। लेकिन क्या आपने यह सोचा है कि जीभ के स्वाद के चक्कर में आप शरीर में जहर घोल रहे होते हैं? आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही इस बात को मानते हैं कि अगर आप दाल और दही एक साथ खाते हैं तो आप अपने शरीर में धीमा जहर भर रहे होते हैं। आज का आधुनिक विज्ञान जो तकनीक में इतना आगे बढ़ चुका है, अगर वह इस बात के विरुद्ध है तो आवश्यक रूप से ही इसका कुछ तो बड़ा कारण होगा। आइए जानते हैं कि दाल और दही को एक साथ क्यों नहीं खाना चाहिए? क्यों विज्ञान और आयुर्वेद ऐसा करने से मना करते हैं और दाल-दही का एक साथ सेवन आपको किन बीमारियों का शिकार बना सकता है।
दाल और दही के एक साथ सेवन को आयुर्वेद ने विरुद्ध आहार कहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि हम तो हमेशा ही दाल के साथ दही खाते हैं। जब तक हम दाल में दही न मिला लें तब तक स्वाद ही नहीं आता है। लेकिन आयुर्वेद में ऐसा करने के लिए बिल्कुल मना किया गया है। दही की तासीर गर्म और भारी होती है। ज्यादातर दालें भी पचने में भारी होती हैं। जब ये दोनों एक साथ खाई जाती हैं, तो ये हमारे शरीर की पाचन शक्ति को बिल्कुल कमजोर कर देती हैं। जब शरीर में भोजन का पाचन सही से नहीं होता है, तो यह शरीर में सड़ने लगता है और सड़कर बहुत ज्यादा जहरीले तत्व बनाने लगता है। यही जहरीले तत्व शरीर में त्वचा रोगों को बढ़ा देते हैं।
आज के विज्ञान के तरीके से देखें तो दही और दाल दोनों ही प्रोटीन के बहुत बड़े स्रोत हैं। दाल प्लांट बेस्ड प्रोटीन का स्रोत है और दही एनिमल बेस्ड प्रोटीन का। दोनों अलग-अलग प्रकृति के प्रोटीन हैं, इसलिए शरीर में इनका पाचन भी अलग-अलग तरीके से होता है। जब दोनों एक साथ खाए जाते हैं, तो हमारे शरीर को इन्हें पचाने के लिए अलग-अलग तरीके से संघर्ष करना पड़ता है। इससे हमारे शरीर की पाचन शक्ति धीमी हो जाती है।
डॉक्टरों से आपने सुना होगा कि कैल्शियम और आयरन को एक साथ कभी नहीं लेना चाहिए। यही बात यहाँ भी लागू होती है क्योंकि दही में कैल्शियम होता है जो दाल में मौजूद आयरन को सोख लेता है। इस कारण दोनों के पोषक तत्वों की बर्बादी हो जाती है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
02 Jan 2026 09:47 am
Published on:
02 Jan 2026 09:47 am
