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दिल्ली में स्ट्रोक के मरीज 40% बढ़े: ठंड और हवा का घातक कॉम्बो बना खतरा!

दिल्ली-एनसीआर में ठंड और प्रदूषण का डबल अटैक देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इन दोनों वजहों से स्ट्रोक के मरीजों की संख्या 40% तक बढ़ गई है। ये दोनों मिलकर तलवार की तरह काम कर रहे हैं, जो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा और बढ़ा रहे हैं।

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Delhi: Stroke cases rise by 40% due to cold, pollution

दिल्ली-एनसीआर में ठंड और प्रदूषण का डबल अटैक देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इन दोनों वजहों से स्ट्रोक के मरीजों की संख्या 40% तक बढ़ गई है। ये दोनों मिलकर तलवार की तरह काम कर रहे हैं, जो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा और बढ़ा रहे हैं।

मौसम का खेल:

मौसम विभाग ने दिल्ली में 7 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच न्यूनतम तापमान की भविष्यवाणी की है। ऊपर से घना कोहरा भी परेशानी बढ़ा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में प्रदूषित हवा मिलकर स्ट्रोक का खतरा और बढ़ा देती है।

बढ़े हुए मरीज, डॉक्टरों की चिंता:

फोर्टिस अस्पताल के डॉ. प्रवीण गुप्ता बताते हैं, "पहले की तुलना में अब लगभग दोगुने मरीज स्ट्रोक के आ रहे हैं। ये ठंड और प्रदूषण का साफ असर है।"

मेदान्ता अस्पताल के डॉ. विनय गोयल भी इस बात से सहमत हैं। वो कहते हैं, "ठंड और प्रदूषण मिलकर तलवार की तरह काम कर रहे हैं। हमारे आईसीयू में स्ट्रोक के मामलों में 20% तक का इजाफ हुआ है।"

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को 'बहुत खराब' बताया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 381 है, जो काफी चिंताजनक है।

स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ा?

आर्टेमिस अस्पताल के डॉ. सुमित सिंह बताते हैं, "सर्दियों में ब्लड प्रेशर उतार-चढ़ाव करता है। ऐसे में अगर हाई ब्लड प्रेशर न कंट्रोल किया जाए तो स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ऊपर से प्रदूषण ज्यादा हो तो जोखिम और बढ़ जाता है।"

डॉ. गुप्ता बताते हैं कि प्रदूषण के कारण हवा में धूल के कण बढ़ जाते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। इससे सूजन बढ़ती है और ब्लड वेसल्स की कार्यप्रणाली कमजोर होती है। नतीजतन, ब्लड प्रेशर और भी बढ़ जाता है और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है।

क्या करें, क्या न करें?

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि हवा खराब होने पर घर के अंदर एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें और बाहर निकलते समय मास्क पहनें। सुबह के समय, जब प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है, टहलने से बचें।

इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करना, धूम्रपान न करना, कम नट्स खाना, हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियां करना और डॉक्टर से नियमित जांच करवाना भी जरूरी है।