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myths and facts-डायबिटीज का इलाज जड़ से संभव नहीं, परहेज बहुत जरूरी

डायबिटीज को लेकर बोलचाल, सोशल मीडिया और वाट्सऐप पर कई तरह की खबरें आती हैं जो भ्रम पैदा करती हैं। जैसे इतने दिन में मर्ज चला जाएगा, परिवार में किसी को है तो सबको हो जाएगी आदि। जानते हैं ऐसे ही कुछ भ्रम और उनसे जुड़ी सच्चाई-

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myths and facts-डायबिटीज का इलाज जड़ से संभव नहीं, परहेज बहुत जरूरी

myths and facts-डायबिटीज का इलाज जड़ से संभव नहीं, परहेज बहुत जरूरी

MYTH : विदेशों में जड़ से इसका इलाज संभव है?
विश्व में डायबिटीज का एक-सा इलाज है। कुछ लोग दावा करते हैं कि जड़ से इलाज संभव है लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हो पाया है। सोशल मीडिया के चक्कर में न पड़ें।
MYTH : डायबिटीज में घाव देरी से भरता, इसलिए सर्जरी से बचना चाहिए?
डायबिटीज रोगी को भी डॉक्टरी सलाह से सर्जरी करवानी चाहिए। डायबिटीज कंट्रोल होने के बाद घाव आसानी से भर जाते हैं। इसको लेकर मन में भ्रम न पालें।
MYTH : जांच खाली पेट चाय पीकर ही करवानी चाहिए?
खाली पेट शुगर जांच महत्त्वपूर्ण है। इसमें केवल पानी ही पी सकते हैं। अक्सर लोग चाय पीने के बाद जांचें करवाते हैं उनको लगता है कि खाली पेट का अर्थ कुछ खाया न हो लेकिन चाय पीने से रिपोर्ट खराब आती है। ऐसा न करें।
MYTH : उम्र के साथ वजन भी बढ़ना चाहिए?
यह गलत बात है। वजन कद के हिसाब से निर्धारित होता है। बुढ़ापे में ज्यादा वजन परेशानी बढ़ाता है। वजन बॉडी मास इंडेक्स के अनुसार रखें। वजन बढ़ने से बीमारियां भी बढ़ती हैं।
MYTH : ग्लूकोमीटर से सही जांच नहीं, लैब से अंतर होता?
ऐसा नहीं है। आजकल विश्वसनीय मीटर बाजार में उपलब्ध हैं। यदि पूरी सावधानी से जांच करें तो ये सही मात्रा दर्शाते हैं। पर लैब से 10-15 प्रतिशत का अंतर आना स्वाभाविक है। परेशान न हों।

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