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Dry Cough Epidemic: मौसम बदलते ही बढ़ी सूखी खांसी की समस्या, डॉक्टर बोले- ये वायरस हो सकते हैं जिम्मेदार

Dry Cough Epidemic: मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच सूखी खांसी, गले में जलन और थकान के मामले बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक वायरस, प्रदूषण और बदलता तापमान इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। जानिए लक्षण, कारण और बचाव के तरीके।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 16, 2026

Dry Cough Epidemic

Dry Cough Epidemic (photo- gemini ai)

Dry Cough Epidemic: कोलकाता में इन दिनों लोगों के बीच एक नई तरह की परेशानी तेजी से बढ़ती दिख रही है। शहर के कई लोग लगातार सूखी खांसी, गले में जलन और सांस से जुड़ी दिक्कतों की शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीछे मौसम में अचानक हो रहे बदलाव बड़ी वजह हो सकते हैं।

दरअसल पिछले कुछ हफ्तों से कोलकाता में मौसम लगातार बदल रहा है। दिन में गर्मी महसूस होती है, लेकिन शाम होते-होते तापमान काफी नीचे चला जाता है। अब मौसम विभाग ने बारिश की भी संभावना जताई है। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे अचानक बदलते मौसम में शरीर को खुद को ढालने में समय लगता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

OPD में बढ़े मरीज

डॉक्टर बता रहे हैं कि अस्पतालों की ओपीडी में पिछले कुछ समय से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है जो सूखी खांसी, गले में खराश, थकान और हल्के बुखार की शिकायत लेकर आ रहे हैं। कई लोगों की खांसी एक-दो दिन में ठीक नहीं हो रही बल्कि कई दिनों तक बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या कई तरह के वायरस की वजह से हो सकती है। इनमें एडेनोवायरस, राइनोवायरस, मेटाप्न्यूमोवायरस और एंटरोवायरस शामिल हैं। ये वायरस आमतौर पर ऊपरी श्वसन तंत्र यानी नाक, गले और सांस की नलियों को प्रभावित करते हैं, जिससे तेज और लगातार सूखी खांसी हो सकती है।

मौसम बदलने से क्यों बढ़ती है बीमारी

डॉक्टरों का कहना है कि जब तापमान बार-बार ऊपर-नीचे होता है तो शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। इससे वायरस और बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करना आसान हो जाता है। ऐसे समय में गला और सांस की नलियां भी जल्दी सूख जाती हैं, जिससे जलन और सूजन हो सकती है। इसके कारण कुछ आम लक्षण दिखाई दे सकते हैं जैसे:

  • लगातार सूखी खांसी
  • गले में खराश या जलन
  • हल्का बुखार
  • थकान और कमजोरी
  • सिरदर्द

प्रदूषण भी बढ़ा रहा परेशानी

मौसम के अलावा हवा में प्रदूषण, धूल और एलर्जी पैदा करने वाले कण भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। कोलकाता में मौसम बदलने के समय अक्सर हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों को ज्यादा परेशानी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार वायरस का असर खत्म होने के बाद भी धूल, पराग कण और प्रदूषण की वजह से खांसी लंबे समय तक बनी रह सकती है।

सूखी खांसी कितने दिन रहती है

आमतौर पर वायरल सूखी खांसी 7 से 14 दिन तक रह सकती है। हालांकि कुछ लोगों में यह कई हफ्तों तक भी बनी रह सकती है। अगर खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा चले, तेज बुखार आए, सांस लेने में दिक्कत हो या सीने में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।

खुद को कैसे बचाएं

मौसम बदलने के समय कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि गला सूखा न रहे। धूल और प्रदूषण से बचने की कोशिश करें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें। हाथों की सफाई का खास ध्यान रखें। पर्याप्त आराम करें और पौष्टिक खाना खाएं। गुनगुना पानी, सूप और हर्बल चाय पिएं। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सावधानी और मजबूत इम्यूनिटी से इस तरह की मौसमी बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।