
आधुनिक टेस्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- chatgtp)
India's Diabetes Crisis: भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि अगर फास्टिंग शुगर, खाने के बाद की शुगर (PP) और HbA1c रिपोर्ट नॉर्मल है, तो उन्हें डायबिटीज का खतरा नहीं है। लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। कई बार शरीर में डायबिटीज की शुरुआत हो चुकी होती है, लेकिन आम शुगर टेस्ट उसे पकड़ नहीं पाते।
इस बात को हाल ही में मेडिकल जर्नल Cureus में प्रकाशित एक रिसर्च ने फिर से चर्चा में ला दिया है। पुणे के बीजे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ नवजात मधुमेह (Neonatal Diabetes Mellitus) केस का खुलासा किया, जिसमें बीमारी की असली वजह जीन टेस्टिंग से पता चली। यह केस बताता है कि आज सिर्फ ब्लड शुगर जांचना ही काफी नहीं है, बल्कि बीमारी की जड़ तक पहुंचना भी जरूरी है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के मुताबिक डायबिटीज अचानक नहीं होती। इसके पहले शरीर कई संकेत देता है। समस्या यह है कि ये संकेत अक्सर सामान्य शुगर टेस्ट में दिखाई नहीं देते। अगर आपके पेट के आसपास चर्बी बढ़ रही है, फैटी लिवर की समस्या है या शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, तो यह भविष्य में डायबिटीज का संकेत हो सकता है। लेकिन फास्टिंग शुगर और HbA1c कई बार इन शुरुआती बदलावों को नहीं पकड़ पाते।
मुंबई के डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कोविल के अनुसार, फैटी लिवर को अब इंसुलिन रेजिस्टेंस का शुरुआती संकेत माना जा रहा है। वहीं, शरीर के अंदर अंगों के आसपास जमा होने वाला विसरल फैट भी डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है। यही वजह है कि अब डॉक्टर केवल वजन या BMI देखने के बजाय बॉडी कम्पोजिशन और मेटाबॉलिक हेल्थ पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
आज कई ऐसे एडवांस टेस्ट मौजूद हैं जो डायबिटीज का खतरा पहले ही पकड़ सकते हैं। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) एक छोटा सेंसर होता है जो पूरे दिन शुगर के उतार-चढ़ाव पर नजर रखता है। इससे रात में या खाने के बाद बढ़ने वाली शुगर का भी पता चल जाता है। HOMA-IR टेस्ट शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस का पता लगाता है, जो डायबिटीज होने से वर्षों पहले बढ़ना शुरू हो सकता है। इसके अलावा 1,5-AG टेस्ट और रेटिनल AI स्कैन जैसे नए टूल भी ऐसे बदलावों को पहचान सकते हैं जो सामान्य रिपोर्ट में छूट जाते हैं।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) की एक रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज को सिर्फ शुगर की बीमारी समझना अब पुरानी सोच हो चुकी है। यह पूरी मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़ी समस्या है, जिसमें फैटी लिवर, पेट की चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और जेनेटिक फैक्टर्स भी अहम भूमिका निभाते हैं।
अगर आपके परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, पेट के आसपास चर्बी बढ़ रही है या फैटी लिवर की समस्या है, तो सिर्फ नॉर्मल शुगर रिपोर्ट देखकर निश्चिंत न हों। डॉक्टर की सलाह से जरूरत पड़ने पर एडवांस टेस्ट करवाएं। क्योंकि कई बार शरीर डायबिटीज का संकेत दे रहा होता है, लेकिन आम टेस्ट उसे पकड़ नहीं पाते।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
3 Jun 2026, 2:16 PM IST
Published on:
3 Jun 2026, 2:16 PM IST
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