
आंख की तरफ इशारा करती हुई युवती- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Eye Twitching Causes: जब किसी की आंख फड़कती है, तो लोग उसे शगुन और अपशगुन से जोड़ने लगते हैं। लेकिन साइंस के नजरिए से देखें तो आंखों का फड़फड़ाना पूरी तरह से एक शारीरिक समस्या है, जो हमारी खराब लाइफस्टाइल और शरीर में होने वाली कुछ कमियों की तरफ इशारा करती है।
अगर आपकी पलकें भी पिछले कुछ दिनों से लगातार परेशान कर रही हैं, तो इस विषय पर सरकारी अस्पताल के आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्रदीप यादव ने काम की बातें साझा की हैं। आइए जानते हैं आंख फड़कने की असल वजह, शरीर में किस चीज की कमी से ऐसा होता है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है।
डॉक्टर बताते हैं कि मेडिकल साइंस में आंख फड़कने की समस्या को मायोकीमिया/ मायोकेमिया (Myokymia) कहा जाता है। यह आंखों के आसपास की मांसपेशियों में होने वाली एक ऐंठन है, जिस पर व्यक्ति का अपना कोई कंट्रोल नहीं रहता है। आमतौर पर यह दिक्कत कुछ सेकंड या मिनट के लिए होती है और खुद ही ठीक हो जाती है। लेकिन यदि आपकी आंखें कई दिनों या हफ्तों तक लगातार फड़क रही हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि आंखों की नसें ज्यादा थक चुकी हैं। यह इस बात का भी संकेत है कि शरीर को अब तुरंत आराम और सही पोषण की सख्त जरूरत है। इस बात को बिल्कुल नजरअंदाज ना करें।
1. मैग्नीशियम की कमी- जब शरीर में मैग्नीशियम कम होता है, तो मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव बढ़ने लगता है, जिससे पलकें फड़कने लगती हैं।
2. कैल्शियम और विटामिन B12- नसों की मजबूती और उनके सही सिग्नल सिस्टम के लिए ये दोनों तत्व बहुत जरूरी हैं। इनकी कमी से आंखों के आसपास की नसों में कमजोरी आने लगती है।
3. पानी की कमी (डीहाइड्रेशन)- शरीर में लिक्विड की कमी होने से भी मांसपेशियों के काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
1. पूरी नींद न लेना- रात को देर तक जागने और 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद न मिलने से आंखों को जरूरी आराम नहीं मिल पाता है।
2. ज्यादा स्क्रीन टाइम होना- लगातार कई घंटों तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिना ब्रेक के काम करने से आंखों पर भारी दबाव पड़ता है।
3. मानसिक तनाव- जब हम बहुत अधिक तनाव या एंग्जायटी से गुजरते हैं, तो हमारा नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे पलकों में हलचल शुरू हो जाती है।
4. आंखों का सूखापन- धूल, प्रदूषण या कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल से जब आंखों के आंसू सूखने लगते हैं, तब भी यह दिक्कत सामने आती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
01 Jun 2026 10:10 am
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