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हेयर ट्रांसप्लांट से पहले जान लें इससे जुड़े खतरे व सावधानियां

मुंबई के 43 वर्षीय व्यक्ति ने इसी मार्च में हेयर ट्रांसप्लांट करवाया था। इसके तुरंत बाद ही सिर, कंधे और चेहरे वाले हिस्से में तेज दर्द और सूजन की समस्या शुरू हो गई।

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हेयर ट्रांसप्लांट से पहले जान लें इससे जुड़े खतरे व सावधानियां

हेयर ट्रांसप्लांट से पहले जान लें इससे जुड़े खतरे व सावधानियां

मुंबई के 43 वर्षीय व्यक्ति ने इसी मार्च में हेयर ट्रांसप्लांट करवाया था। इसके तुरंत बाद ही सिर, कंधे और चेहरे वाले हिस्से में तेज दर्द और सूजन की समस्या शुरू हो गई। मरीज को अगले दिन बड़े हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। जहां उसकी मृत्यु हो गई। यह मामला और जांच की मांग संसद में भी उठी। एक्सपर्ट की मानें तो इसमें दो बातें निकलकर आ रही हैं। पहली, इसमें व्यक्ति को 12 घंटे तक लोकल एनेस्थिसिया (बेहोशी) में रखकर ट्रांसप्लांट किया गया। दूसरी, संभवत: उस व्यक्ति को एलर्जी की समस्या थी। दवा रिएक्शन कर गई होग
एक अनुमान के अनुसार सामान्य व्यक्ति के सिर में करीब एक लाख बाल होते हैं। इनमें से 90 फीसदी बाल ऐसे होते हैं जो झड़ते और निकलते रहते हैं। लेकिन कई बार किसी कारण से बालों का झडऩा तेजी से जारी रहता है लेकिन नए बाल नहीं आते हैं। ऐसे में गंजापन होना स्वाभाविक है। इससे बचने के लिए लोग तरह-तरह के देसी नुस्खों के साथ मॉडर्न, आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाइयों और लोशन का भी इस्तेमाल करते हैं। इससे भी बचाव नहीं होता है तो हेयर ट्रांसप्लांट कराते हैं। जानते हैं कि हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़े विभिन्न पहलुओं के
बारे में-
बाल झडऩे के कारण
आनुवांशिकता बाल झडऩे का प्रमुख कारण है। इसके साथ खराब डाइट, अधिक तनाव, कुछ बीमारियां, हार्मोन का असंतुलन और दवाइयों के रिएक्शन से भी बाल झड़ते हैं।
एक्सपर्ट से करवाएं, टेक्नीशियन से नहीं
कई हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर्स पर डॉक्टर्स की जगह टेक्नीशियन ही यह प्रोसिजर करते हैं। ऐसा न होने दें। डॉक्टर की योग्यता जानने के बाद ही ट्रांसप्लांटेशन करवाएं क्योंकि क्वालिफाइड डॉक्टर्स को फायदे-नुकसान की जानकारी होती है। कई मरीजों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या दूसरे रोग होते हैं। इन समस्याओं को कंट्रोल करने के बाद हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया होती है। डॉक्टर क्रि टिकल केयर भी देखते हैं।
एलर्जी-सर्जरी की बात बताएं, कई टेस्ट जरूरी
हेयर ट्रांसप्लांट में दूसरी सर्जरी जितना ही खतरा रहता है। पर इसमें सावधानी बरतकर यहजोखिम कम किया जा सकता है। इसमें एक-एक बाल को लगाते हैं। ऐसे में करीब 6-7 घंटे का समय लगता है। मरीज को बेहोशी के इंजेक्शन लगते हैं। अगर इससे ज्यादा समय तक की बेहोशी की दवा देते हैं तो रिस्क बढ़ जाती है। ट्रांसप्लांट से पहले ब्लड, एलर्जी व ईसीजी समेत कई सेफ्टी टेस्ट किए जाते हैं। अगर किसी को एलर्जी है या पहले कोई सर्जरी हुई है तो अपने डॉक्टर को जरूर बताएं।
खतरनाक है ब्यूटी पार्लर में सर्जरी
हेयर ट्रासंप्लांट के लिए कोई कानून नहीं है। इसलिए कई ब्यूटी पार्लर में भी हेयर ट्रांसप्लांट हो रहे हैं। जहां पर न तो सर्जरी और न ही इमर्जेंसी की स्थिति मेें निपटने की सुविधा होती है। ऐसे जगहों में ट्रांसप्लांट करवाना जानलेवा हो सकता है।
सावधानी बरतें
ट्रांसप्लांट के एक सप्ताह तक विशेष सावधानी बरतनी होती है ताकि किसी तरह का इंफेक्शन न हो। इसमें घूल-मिट्टी और पसीने से बचाना होता है। टोपी, हेलमेट या विग नहीं पहनना होता है। बाल धोने के लिए डॉक्टर ही तरीका बताते हैं। कुछ लोशन और एंटीबायोटिक्स दवाइयां भी दी जाती हैं। लोशन को प्रभावित हिस्से में लगाना होता है।
दो तरह से होता है ट्रांसप्लांट
य ह दो तरीके से होते हैं। पहला, फॉलिकूलर यूनिट एक्ट्रक्शन (एफयूई) और दूसरा, फॉलिकूलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन (एफयूटी)। एफयूई में डोनर हिस्से से दो-दो बाल निकालकर लगाए जाते हैं जबकि एफयूटी में बालों का एक हिस्सा (स्ट्रिप) निकाल लिया जाता है। इसमें टांके भी लगाने पड़ते हैं। दोनों में बालों को सेल्स सहित निकाला जाता है ताकि ट्रांसप्लांट के बाद सेल्स एक्टिव हो जाएं।
ट्रांसप्लांट के कुछ रिस्क
दर्द- इसमें थोड़ा बहुत दर्द आम बात है। अगर तेज दर्द हो रहा है तो डॉक्टर को इस बारे में जानकारी दें।
सुन्नपन- बाल निकालने से प्रभावित हिस्सा 3-18 सप्ताह तक सुन्न रह सकता है। इससे अधिक सुन्न रहता है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
ब्लीडिंग- ट्रांसप्लांट के दौरान ब्लीडिंग हो सकती है। कुछ लोगों में जल्दी तो कुछ लोगों में देरी से ठीक होती है।
सूजन- चेहरे-माथे पर सूजन होना सामान्य है। लेकिन ज्यादा सूजन होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाकर इलाज लें।
अल्सर -इसमें जब बालों की जड़ें डैमेज होती और त्वचा के एकदम अंदर तक धंस जाती हैं तो अल्सर हो सकता है लेकिन यह घातक नहीं होते।
इंफेक्शन- कई बार अनुचित और गंदे उपकरणों के इस्तेमाल से इंफेक्शन की आशंका रहती है। हाइजीन का ध्यान रखें।
पतले बाल- अगर बाल सही से नहीं लगते हैं तो बाद में पतले होकर झडऩे लगते हैं। कई लोगों में दोबारा से गंजापन हो सकता है।
तेज खुजली- ट्रांसप्लांट के बाद सिर में पपड़ी बनने व खुजली होने लगती है। कुछ को शैंपू आदि से राहत मिल जाती, कुछ में समस्या गंभीर हो सकती है।
डॉ. कवीश चौहान, हेयर ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट समन्वयक, आइएडीवीएल (हेयर ट्रांसप्लांट), नई दिल्ली