
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम: महिलाओं में ज्यादा, हार्ट अटैक जैसे होते हैं लक्षण
दिल का टूट जाना यानी ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक ऐसी ही बीमारी है जिसमें हृदय का एक भाग अस्थाई रूप से कमजोर हो जाता है। इससे उसकी पंपिंग क्षमता कम हो जाती है। यह स्थिति तब होती है जब व्यक्ति ज्यादा तनाव लेता है। इससे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं और फिर हृदय की नसें सिकुडऩे लगती हैं। इसे स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी भी कहते हैं। ऐसा कोई दुर्घटना या स्वजन के आकस्मिक निधन, दुखद समाचार आदि कारणों से होता है। इसमें हार्ट अटैक जैसे ही लक्षण दिखते हैं जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना, पसीना आना, जी घबराना, बीपी कम होना, धडक़न अनियमित होना और फेफड़ों में पानी भरना आदि।
खतरा किन्हें
पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है। यदि 50 वर्ष से अधिक उम्र, मिर्गी रोगियों या जिनके सिर में गंभीर चोट लगती है उनमें आशंका ज्यादा रहती है। जिन्हें ज्यादा तनाव होता या फिर मानसिक रोगी हैं उनमें भी यह दिक्कत होती है।
इस तरह पता करते हैं हार्ट अटैक है या नहीं
प्रांरभिक जांच खून की होती है। इसे कार्डियक मार्कर्स टेस्ट कहते हंै। इकोकार्डियोग्राफी से हार्ट के एक भाग के असामान्य रूप से फूल जाने एवं कम सिकुडऩे की स्थिति को देखते हैं। इससे पता चलता है कि हार्ट अटैक है या नहीं। इसका इलाज दवाओं से होता है। कई बार खून की नलियों में ब्लॉकेज होने पर खून पतला करने की दवा देते हैं।
इससे बचाव के लिए योग-व्यायाम भी जरूरी
यह बीमारी मुख्य रूप से तनाव के कारण होती है। कम उम्र में भी कई बार देखने को मिलती है। इसलिए नियमित योग-व्यायाम और ध्यान का अभ्यास करें। 30-45 मिनट तक रोज अभ्यास करना चाहिए। इससे तनाव कम होता है। तनाव घटने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का बनना बंद हो जाता है फिर इस बीमारी की आशंका कम हो जाती है। साथ ही हैल्दी डाइट लें।
Updated on:
17 Apr 2021, 10:30 PM IST
Published on:
17 Apr 2021, 10:30 PM IST
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