18 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Heart Attack Recovery Injection: हार्ट अटैक के बाद रिकवरी के लिए नया इंजेक्शन, जानें कैसे काम करती है नई तकनीक

Heart Attack Recovery Injection: हार्ट अटैक के बाद दिल की रिकवरी के लिए एक नया इंजेक्शन विकसित किया जा रहा है, जो ANP हार्मोन बढ़ाकर दिल को हफ्तों तक सपोर्ट दे सकता है। जानें saRNA तकनीक क्या है और कैसे काम करती है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

Mar 18, 2026

Heart Attack Recovery Injection

Heart Attack Recovery Injection (Photo- gemini ai)

Heart Attack Recovery Injection: हार्ट अटैक से बच जाने के बाद भी मरीजों के लिए असली चुनौती तब शुरू होती है, जब दिल को दोबारा मजबूत बनाना होता है। रिकवरी का यह दौर काफी लंबा और जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोजा है, जो इस प्रक्रिया को आसान बना सकता है।

क्या है यह नया इंजेक्शन?

यह नई तकनीक एक साधारण इंजेक्शन पर आधारित है, जिसे शरीर की मांसपेशियों में दिया जाता है। यह इंजेक्शन शरीर को एक खास हार्मोन बनाने के लिए प्रेरित करता है, जो दिल को ठीक होने में मदद करता है।

ANP हार्मोन कैसे करता है काम?

जब किसी को हार्ट अटैक आता है, तो शरीर खुद एक हार्मोन बनाता है, जिसे ANP (Atrial Natriuretic Peptide) कहते हैं। यह दिल पर दबाव कम करता है और नुकसान को सीमित करने में मदद करता है। लेकिन समस्या यह है कि शरीर इस हार्मोन की बहुत कम मात्रा बनाता है, जिससे ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता।

इंजेक्शन कैसे बढ़ाता है रिकवरी?

यह इंजेक्शन शरीर को कुछ समय के लिए इंस्ट्रक्शन देता है कि वह ज्यादा मात्रा में ANP बनाए। इसके बाद यह हार्मोन खून के जरिए दिल तक पहुंचता है और उसे ठीक होने में मदद करता है। इससे दिल पर तनाव कम होता है और उसकी कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है।

saRNA तकनीक क्या है?

इस इंजेक्शन में “self-amplifying RNA (saRNA)” नाम की एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। आसान भाषा में समझें तो यह तकनीक शरीर की कोशिकाओं को थोड़े समय के लिए निर्देश देती है। खास बात यह है कि ये निर्देश खुद की कॉपी भी बना लेते हैं, जिससे असर ज्यादा समय तक बना रहता है। यही वजह है कि एक ही इंजेक्शन का असर कई हफ्तों तक रह सकता है।

हार्ट अटैक के बाद ‘गोल्डन टाइम’ क्यों जरूरी?

डॉक्टरों के मुताबिक, हार्ट अटैक के बाद शुरुआती कुछ हफ्ते बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान दिल सबसे ज्यादा कमजोर होता है। अगर इस समय सही इलाज और सपोर्ट मिल जाए, तो दिल की रिकवरी बेहतर हो सकती है और आगे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी

पहले इस तरह की थेरेपी के लिए दिल तक पहुंचने के लिए सर्जरी करनी पड़ती थी। लेकिन अब एक साधारण इंजेक्शन से ही यह काम संभव हो सकता है। यह बदलाव इलाज को आसान और ज्यादा सुरक्षित बना सकता है।

अभी और रिसर्च है बाकी

हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। वैज्ञानिक इसकी सेफ्टी, सही डोज और असर को लेकर और अध्ययन कर रहे हैं। इसके बाद ही इसे आम मरीजों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह नई खोज दिल के मरीजों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है। अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो हार्ट अटैक के बाद रिकवरी पहले से कहीं ज्यादा आसान और प्रभावी हो सकती है।