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हेपेटाइटिस बी का टीका: जानलेवा बीमारी, मगर टीका लेने वालों की संख्या बहुत कम!

एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में हेपेटाइटिस बी का टीका लेने वालों की संख्या बहुत कम है। ऐसा इस बीमारी के बारे में कम जानकारी और जागरूकता की वजह से होता है।

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एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत में हेपेटाइटिस बी के टीके को लेने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों को इस बीमारी और टीके के बारे में जानकारी नहीं है।

हेपेटाइटिस बी एक गंभीर बीमारी है जो लीवर को खराब कर देती है। दुनियाभर में करीब 29 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं और हर साल लगभग 8 लाख 87 हज़ार लोगों की मौत हो जाती है।

अध्ययन के अनुसार भारत में करीब 3 करोड़ 70 लाख लोग हेपेटाइटिस बी के वाहक हैं। मगर इस बीमारी और इसके बचाव के लिए लगने वाले टीके के बारे में लोगों को कम जानकारी है।

अध्ययन में 3500 लोगों (डॉक्टरों और 18 साल से कम उम्र के लोगों को छोड़कर) पर सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण में पाया गया कि सिर्फ 25% लोगों को ही इस बीमारी के बारे में सही जानकारी थी, जैसे ये कैसे फैलती है, लीवर को कैसे नुकसान पहुंचाती है और टीका लगवाना कितना जरूरी है।

इसके अलावा सिर्फ 22.7% लोगों ने ही हेपेटाइटिस बी का पूरा टीकाकरण करवाया था।

अध्ययन करने वाले डॉक्टर अनिल अरोड़ा का कहना है कि ये टीकाकरण दर बहुत कम है, खासकर इस बीमारी को देखते हुए और टीके की रोकथाम क्षमता को ध्यान में रखते हुए। ये टीका हेपेटाइटिस बी के संक्रमण को रोकने में और लीवर को होने वाले गंभीर नुकसान, जैसे सिरोसिस और लीवर कैंसर, से बचाने में बहुत प्रभावी है।

अध्ययन में ये भी पाया गया कि महिलाओं, कम पढ़े-लिखे लोगों और गांवों में रहने वाले लोगों में टीकाकरण की दर कम है।

डॉक्टर अरोड़ा का कहना है कि लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए खास कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना चाहिए कि लोग पूरा टीकाकरण करवाएं क्योंकि सिर्फ एक या दो टीके लेने से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती है।


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