
तंबाकू-मुक्त सिगरेट के स्वास्थ्य जोखिमों को दर्शाती प्रतीकात्मक छवि (Photo- chatgtp)
Herbal Cigarette Side Effects: आजकल बाजार में हर्बल, नेचुरल और तंबाकू-मुक्त सिगरेट तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। कई लोग इन्हें सामान्य सिगरेट का सुरक्षित विकल्प मानकर इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ ब्रांड्स तो दावा करते हैं कि तुलसी, पुदीना और लौंग जैसी जड़ी-बूटियों से बनी ये सिगरेट तनाव कम करने में भी मदद करती हैं। लेकिन नई रिसर्च बताती है कि हर्बल सिगरेट को हेल्दी मानना बड़ी भूल हो सकती है।
जर्नल ऑफ हेजार्डस मैटेरियल्स (Journal of Hazardous Materials) में प्रकाशित स्टडी हर्बल और तंबाकू वाली सिगरेट के धुएं की तुलना की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि तंबाकू न होने का मतलब यह नहीं है कि धुआं सुरक्षित हो जाता है।
रिसर्च के अनुसार, हर्बल सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले तेंदू के पत्ते जलने पर ऐसे कण पैदा करते हैं जो फेफड़ों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं। अध्ययन में पाया गया कि हर्बल सिगरेट का ऑक्सीडेटिव पोटेंशियल सामान्य सिगरेट के मुकाबले 49% अधिक था।ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने से फेफड़ों की कोशिकाएं और टिश्यू क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर सांस से जुड़ी गंभीर समस्याएं और COPD जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
हर्बल सिगरेट का नुकसान सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है। स्टडी में पाया गया कि इसके धुएं में मौजूद जहरीले तत्व शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं। यह सूजन धीरे-धीरे खून की नसों को नुकसान पहुंचाती है। नसों में लगातार सूजन रहने से ब्लॉकेज का खतरा बढ़ सकता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि हर्बल सिगरेट के धुएं में बहुत छोटे आकार के अल्ट्राफाइन कण मौजूद होते हैं। ये कण इंसानी बाल से लगभग 100 गुना छोटे होते हैं। इतने सूक्ष्म होने के कारण ये फेफड़ों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को पार करके सीधे रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं। रिसर्च में यह भी पाया गया कि ऐसे कणों की मात्रा सामान्य सिगरेट की तुलना में हर्बल सिगरेट में लगभग 20% ज्यादा थी।
स्टडी का एक और चौंकाने वाला निष्कर्ष यह था कि कुछ हर्बल सिगरेट में लेड (सीसा) जैसी भारी धातु भी पाई गई। लेड शरीर के लिए बेहद जहरीला माना जाता है। इसके लंबे समय तक संपर्क में रहने से नर्वस सिस्टम, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं।
एम्स दिल्ली के कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. हर्षल रमेश साल्वे का कहना है कि हर्बल सिगरेट को सुरक्षित समझना गलत है। वहीं, वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता पी. एस. गणेश सुब्रमण्यन के मुताबिक नुकसान केवल तंबाकू या निकोटीन से नहीं होता।जब भी कोई जैविक पदार्थ, जैसे पत्तियां, जड़ी-बूटियां या कागज जलता है, तो उससे कार्बन मोनोऑक्साइड, कालिख, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर जैसे हानिकारक तत्व निकलते हैं। ये सभी फेफड़ों और पूरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
03 Jun 2026 12:47 pm
Published on:
03 Jun 2026 12:41 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
