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साइलेंट किलर: हर घर में पैर पसार रहा हाई बीपी, तेजी से बढ़ रहे मरीज

बदलती लाइफस्टाइल, काम का स्ट्रेस और खानपान में गड़बड़ी के कारण अलवर सहित पूरे देश में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थिति यह है कि अब लगभग हर घर में इस बीमारी ने दस्तक दे दी है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर इसकी जांच और इलाज नहीं कराया गया, तो यह साइलेंट किलर आपकी किडनी और दिल को हमेशा के लिए ठप कर सकता है।

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high bp cases

representative picture (patrika)

आजकल हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) सेल की हालिया रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में एक बड़ी तादाद उन लोगों की है जो गंभीर रूप से हाइपरटेंशन का शिकार हैं। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2022-23 में एनसीडी क्लीनिकों में जांच कराने आए 11.80 लाख मरीजों में से करीब 4.4 फीसदी लोग हाई बीपी से पीड़ित मिले थे।

लेकिन सिर्फ दो साल के भीतर, यानी साल 2024-25 में यह आंकड़ा खतरनाक तरीके से बढ़ गया। इस दौरान जांच कराने आए 9.26 लाख लोगों में से 7.57 प्रतिशत मरीजों में हाइपरटेंशन की पुष्टि हुई। इस साल भी मरीजों की यह संख्या लगातार ग्राफ ऊपर की ओर ले जा रही है, जो एक बड़े खतरे की घंटी है।

दुनियाभर में बड़ी आबादी अनजानी, क्यों कहते हैं इसे 'साइलेंट किलर'?

ग्लोबल लेवल पर भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। दुनिया में करीब 1.4 अरब लोग हाई बीपी की समस्या से जूझ रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इनमें से करोड़ों लोग ऐसे हैं जिन्हें खुद पता ही नहीं है कि वे इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं। सीनियर डॉक्टरों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर को 'साइलेंट किलर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते। जब तक मरीज को सिरदर्द, चक्कर आना या घबराहट जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तब तक यह बीमारी शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर चुकी होती है।

किडनी और दिल को पहुंचा रहा है नुकसान

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने का सीधा असर हमारी किडनी और दिल पर पड़ता है। जब बीपी हाई होता है, तो किडनी की खून ले जाने वाली नसों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इससे धीरे धीरे किडनी खराब (किडनी फेलियर) होने का खतरा पैदा हो जाता है। इसके साथ ही, हाई बीपी के कारण दिल को शरीर में खून पंप करने के लिए जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यही वजह है कि आजकल बहुत ही कम उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

बचाव ही है सबसे बड़ा इलाज

डॉक्टरों की सलाह है कि इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाते रहना चाहिए। इसके अलावा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ छोटे बदलाव करके जैसे नमक का सेवन कम करना, रोजाना 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करना, पूरी नींद लेना और जंक फूड से दूरी बनाकर इस 'साइलेंट किलर' को मात दी जा सकती है, ताकि बीमारियों से बचा जा सके।