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Allergy symptoms: जानें कैसे एलर्जी के सिम्टम्स हैं कोविड — 19 से अलग

बदलते मौसम में सबसे बड़ी दुविधा इस बात की है कि लक्षणों के आधार पर कोल्ड, फ्लू, सीजनल एलर्जी और कोरोना वायरस के बीच का अंतर समझ नहीं आ पा रहा है। इस कारण सर्दी-गर्मी के असर से भी लोग भयभीत हो रहे हैं और कोरोना संक्रमण का डर उन्हें अधिक सताने लगता है।

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How allergy symptoms are different from covid —19

How allergy symptoms are different from covid —19

नई दिल्ली। कुछ लोगों को किसी खास गंध से एलर्जी होती है। एलर्जी शरीर की संवेदनशील प्रक्रिया है, जो किसी विशिष्ट पदार्थ के अवशोषण से बाहरी लक्षणों के रूप में प्रदर्शित होती है। कई बार इसमें उल्टी होना, नजला, चक्कर आना, शरीर का नीला पड़ जाना आदि जैसी असामान्य क्रियाएं होने लगती हैं। कोई भी खाने की चीजें किसी भी व्यक्ति पर प्रतिक्रिया कर सकता है। यह उस व्यक्ति विशेष की शारीरिक संरचना पर निर्भर करता है कि उसके उत्तक किस पदार्थ से संवेदनशील हो उठते हैं।

कोरोना
एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यह कोरोना वायरस गले और शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में आपकी नाक और मुंह में ज़्यादा जाने की सम्भावना होती है। आपके आस-पास की हवा में छींकने, खांसने या सांस लेने की संभावना अधिक हो सकती है।


कोरोना वायरस से पीड़ित लोगो के लक्षण कुछ इस तरह के होते है

बुखार
थकान
सुखी खासी
नाक का बंध होना
बेहति नाक
गले कि खराश
सांस लेने मे कठिनाई

एलर्जी के लक्षण
चाहे महिला हो या पुरुष, कुदरत ने बाहरी तत्वों को सहन करने की खास ताकत दी है। फिर भी कई बार ऐसे तत्व जो मनुष्य के शरीर पर दुष्प्रभाव डालने वाले और शरीर के भीतर पहुंचने की कोशिश करते हैं, तब शरीर के आंतरिक तत्व हलचल में आकर उन उल्टे तत्वों के प्रभाव को शरीर पर पड़ने की कोशिश को रोकते हैं। इस तरह की प्रक्रिया एलर्जी की उत्पत्ति का कारण बनती है।

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की एलर्जी व कोरोना में अंतर को ऐसे पहचाने

केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में विभागाध्यक्ष तथा इंडियन कालेज ऑफ एलर्जी एंड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत कहते हैं, एलर्जी शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली के धूलकणों, मौसम में परिवर्तन, परागकणों और जानवरों के रेशों के प्रति प्रतिक्रिया की वजह से होती है। हर मौसम में विभिन्न प्रकार के पराग-कण पाये जाते है। ये छोटे छोटे परागकण नाक में घुसकर उसके भीतर श्लेष्मा की परत से चिपक जाते हैं। इसके बाद यह नाक से गले तक पहुंच जाते हैं और रोग प्रतिरक्षा तंत्र पर असर करते हैं। इन कणों के प्रतिरोध की वजह से शरीर में हिस्टामीन निकलता हैं जो तेजी से फैलकर एलर्जी के लक्षण पैदा करता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह हल्की एलर्जी साइनस संक्रमण, लिम्फ नोड संक्रमण और अस्थमा जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।