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Study : यूपी, बिहार में निमोनिया से ठीक होने के बाद बच्चों में मौत का खतरा ज्यादा

उत्तर प्रदेश और बिहार के बच्चे अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद न्यूमोनिया की ओर से मरने के लिए लगभग दोगुना जोखिम में हैं, और यह मुख्य रूप से चिकित्सा का परिचार की कमी के कारण है।

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Kids in UP, Bihar Twice as Likely to Die After Hospital Discharge

उत्तर प्रदेश और बिहार के बच्चे अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद न्यूमोनिया के प्रति लगभग दोगुना जोखिम में हैं, और इसका मुख्य कारण मेडिकल फॉलोअप की कमी है।

जबकि न्यूमोनिया से पीड़ित बच्चों की राष्ट्रीय अस्पताल मौत दर 1.9 प्रतिशत है, तो इस बीमारी की कम से कम तीन महीने बाद 3 प्रतिशत से अधिक लोगों की मौत होती है।

केजीएमयू में हाल ही में एक अध्ययन ने एक चिंताजनक पैटर्न का खुलासा किया है।

दिसंबर में 'लैंसेट एशिया' में प्रकाशित इस अध्ययन का शीर्षक 'उत्तर भारत के दो राज्यों में गंभीर न्यूमोनिया से पीड़ित बच्चों में उच्च पोस्ट-डिस्चार्ज मौत' है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की गई है, जो गंभीर न्यूमोनिया को पार करने के बाद भी।

इस अध्ययन के प्रमुख लेखक, केजीएमयू के पूर्व बच्चा रोग विभाग के प्रोफेसर शाली अवस्थी और उसी विभाग के डॉ. एके पांडेय हैं, ने बताया कि 934 ऐसे बच्चों का पीछा किया गया था जो पाँच वर्ष से कम आयु के थे और जिन्हें लखनऊ, इटावा, पटना और दरभंगा के 117 अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से गंभीर न्यूमोनिया के लिए भर्ती किया गया था।

शाली ने कहा, "हमने यह पाया कि शिशु, जिनमें जन्म से ही हृदय रोग, कुपोषण और जो गाँवों में रहते हैं, वे सब पोस्ट-डिस्चार्ज मौत के लिए अधिक संवेदनशील थे।"

(आईएएनएस)