
घुटने का दर्द (प्रतीकात्मक तस्वीर) (source- gemini)
Knee Pain Surgery vs Exercise: घुटनों का दर्द जब बढ़ने लगता है, तो डॉक्टर अक्सर सर्जरी की सलाह देते हैं। लेकिन The New England Journal of Medicine की एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि घुटने की कुछ सर्जरी आगे चलकर आर्थराइटिस (गठिया) के खतरे को और बढ़ा सकती हैं । यानी जो ऑपरेशन आप दर्द मिटाने के लिए करवा रहे हैं, वो भविष्य में इसे और बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं कि क्या है ये नई रिसर्च और कब सर्जरी का विकल्प सही हो सकता है।
इस स्टडी में ये बात सामने आई है कि जिन लोगों ने घुटने की छोटी-मोटी सर्जरी (जैसे मेनिस्कस रिपेयर) करवाई, उनमें दो साल बाद आर्थराइटिस यानी गठिया के लक्षण उन लोगों के मुकाबले ज्यादा बढ़ गए जिन्होंने कोई ऑपरेशन नहीं कराया था। सर्जरी की वजह से घुटने के जोड़ की कुदरती बनावट में थोड़ा बदलाव आ जाता है।
इस बदलाव के कारण घुटने के खास हिस्सों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे वहां कार्टिलेज जल्दी घिसने लगता है। रिसर्च के मुताबिक, मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत और फिजियोथेरेपी से घुटने को जो सपोर्ट मिलता है, वह लंबे समय में सर्जरी से कहीं ज्यादा बेहतर और टिकाऊ होता है ।
एक प्राइवेट Healthcare हॉस्पिटल की रिपोर्ट अनुसार, आपको ऑपरेशन के बारे में तब सोचना चाहिए जब घुटने के बीच कार्टिलेज पूरी तरह खत्म हो जाए और हड्डियां आपस में टकराने लगें। जब आप महीनों तक फिजियोथेरेपी कर चुके हों, वजन भी घटा लिया हो और दवाइयां भी ले रहे हों, फिर भी दर्द में आराम न मिले । अगर दर्द की वजह से आपकी रात की नींद खराब हो रही है या आप घर के अंदर बाथरूम तक जाने में भी लाचार महसूस कर रहे हैं । अगर आपका घुटना चलते-चलते अचानक लॉक हो जाता है या पैर पूरी तरह सीधा या मुड़ नहीं पा रहा है ।
स्टडी के मुताबिक, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल में बदलाव के नतीजे कहीं ज्यादा टिकाऊ होते हैं। अगर घुटने के आसपास की मांसपेशियां ताकतवर होंगी, तो जोड़ पर पड़ने वाला बोझ वो खुद झेल लेंगी। शरीर का वजन बढ़ने से घुटनों पर सीधा असर पड़ता है। थोड़ा सा वजन घटाने से भी दर्द में बहुत राहत मिलती है। सही तरीके से की गई कसरत जोड़ के अंदर के कुदरती लुब्रिकेशन को बनाए रखती है, जिससे सूजन कम होती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
14 May 2026 10:26 am
Published on:
14 May 2026 09:38 am
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