
Knee pain treatment : क्या घूटनों के दर्द का इलाज सर्जरी से संभव है जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर (फोटो सोर्स : Freepik)
Knee Pain Treatment : हमारा घुटना शरीर का सबसे बड़ा जोड़ है और रोजमर्रा के कामों, जैसे चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने या बिस्तर से उठने में बहुत जरूरी है. जब इसमें दर्द होता है, तो धीरे-धीरे ज़िंदगी की क्वालिटी खराब होने लगती है. अगर घुटने का दर्द चोट, गठिया या ज्यादा इस्तेमाल से पुराना हो गया है, तो डॉक्टर को दिखाना बहुत ज़रूरी हो जाता है. कई बार तो दोबारा चल-फिर पाने और आज़ादी से काम करने के लिए ऑपरेशन की भी ज़रूरत पड़ सकती है. आइए जानते हैं डॉक्टर अमित मीणा, सीनियर कंसलटेंट-एन्थ्रोप्लास्टी एंड एन्थ्रोस्कोपी से क्या सर्जरी से घूटनों से दर्द में राहत पाई जा सकती है।
घुटने में दर्द (Knee Pain) कई वजहों से हो सकता है, जिनमें से कुछ मुख्य ये हैं:
ज़्यादा इस्तेमाल: जब जोड़ पर बार-बार एक ही तरह का तनाव पड़ता है या एक ही तरह की हरकतें ज़्यादा होती हैं.
गठिया: इसमें ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियाँ शामिल हैं.
चोटें: लिगामेंट (मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाले ऊतक) का फटना, मेनिस्कस (घुटने के अंदर का गद्दी जैसा हिस्सा) में चोट लगना या हड्डी का टूट जाना (फ्रैक्चर).
शुरुआत में ये समस्याएं मामूली लग सकती हैं, लेकिन अगर इनका इलाज न किया जाए, तो ये और ज़्यादा गंभीर हो सकती हैं.
Joint Pain Relief: जोड़ों के दर्द पर एक्सपर्ट की सलाह
चलने-फिरने में दिक्कत: दर्द के कारण चलना, झुकना और सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल हो जाता है. इससे आदमी कम सक्रिय रहने लगता है, जिसका सेहत पर बुरा असर पड़ता है.
दूसरों पर निर्भरता: जब आप खुद से चल-फिर नहीं पाते, तो छोटे-छोटे कामों के लिए भी दूसरों की मदद लेनी पड़ती है, जैसे टॉयलेट जाना या कुर्सी से उठना. इससे आत्मविश्वास कम होता है और तनाव बढ़ता है.
कसरत न कर पाना: दर्द के डर से लोग कोई भी शारीरिक गतिविधि नहीं करते. इससे मांसपेशियाँ कमज़ोर होती हैं, वज़न बढ़ता है और शुगर या दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.
नींद की समस्या: घुटने का दर्द रात को सोने नहीं देता. इससे थकान, चिड़चिड़ापन और किसी भी काम में ध्यान न लगना जैसी दिक्कतें आती हैं. नींद की कमी से दर्द और बढ़ जाता है.
मानसिक परेशानी: घुटने का दर्द चिंता, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन भी पैदा कर सकता है. जब आप सक्रिय और आत्मनिर्भर नहीं रहते, तो आत्मसम्मान पर असर पड़ता है और मानसिक सेहत बिगड़ जाती है.
पैसों का बोझ: फिजियोथेरेपी, दर्द की दवाएँ, चलने-फिरने में मदद करने वाले उपकरण और बार-बार डॉक्टर के पास जाने में काफी पैसा खर्च होता है. अगर काम पर भी असर पड़े, तो ये बोझ और बढ़ जाता है.
जीवन की गुणवत्ता में कमी: चलने-फिरने में दिक्कत, लोगों से दूरी, मानसिक तनाव और लगातार पैसे का दबाव, इन सबसे ज़िंदगी की क्वालिटी बहुत खराब हो जाती है.
डॉक्टर अमित मीणा ने बताया जिन लोगों को घुटने का पुराना दर्द है, उनके लिए घुटने का पूरा ऑपरेशन (टोटल नी रिप्लेसमेंट - TKR) एक बहुत अच्छा समाधान हो सकता है:
आज़ादी वापस मिलती है: ऑपरेशन के बाद मरीज़ रोज़मर्रा के काम खुद से कर पाता है, जिससे उसका आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है.
दर्द से बड़ी राहत: ज़्यादातर मरीज़ ऑपरेशन के बाद पुराने दर्द से पूरी तरह या काफी हद तक छुटकारा पा लेते हैं, जिससे उनकी ज़िंदगी की क्वालिटी में बहुत सुधार आता है.
शारीरिक सेहत में सुधार: दर्द कम होने से व्यक्ति चल पाता है, कसरत कर पाता है और बाकी शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा ले पाता है, जिससे उसकी पूरी सेहत बेहतर होती है.
मानसिक सेहत में सुधार: दर्द कम होने और शरीर से सक्रिय होने से मानसिक स्थिति में भी अच्छा बदलाव आता है. मरीज़ का मनोबल और आत्मबल दोनों बढ़ते हैं.
लंबे समय में सस्ता: शुरुआत में ऑपरेशन महंगा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में दवाओं, फिजियोथेरेपी और बाकी इलाजों पर निर्भरता कम होने से ये आर्थिक रूप से फ़ायदेमंद साबित होता है.
डॉक्टर अमित मीणा ने बताया घुटने का पूरा ऑपरेशन (TKR) उन मरीज़ों के लिए एक बेहतरीन इलाज है जो पुराने घुटने के दर्द से परेशान हैं. सही समय पर डॉक्टर से सलाह और इलाज न सिर्फ दर्द को कम करता है, बल्कि व्यक्ति को फिर से सक्रिय, आत्मनिर्भर और मजबूत ज़िंदगी जीने का मौका देता है.
Published on:
01 Jun 2025 11:48 am
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
