4 नवंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पुरुषों में कम नींद से बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा, जानें कितने घंटे सोना है जरूरी

Heart Health: नींद का महत्व शरीर के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है, और पुरुषों के लिए यदि नींद की पूर्ति 6 घंटे से कम होती है, तो हृदय के स्वास्थ्य को कई नुकसान हो सकते हैं। इसलिए, आइए जानें कि यदि आप अपनी हृदय स्वास्थ्य को सुधारना चाहते हैं, तो आपको कितनी देर सोना चाहिए।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Manoj Vashisth

•

Updated: 4 Oct 2023, 10:05 AM IST

heart attack

heart attack : Lack of sleep may double men's risk of heart attack

Heart Health: नींद का महत्व शरीर के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है, और पुरुषों के लिए यदि नींद की पूर्ति 6 घंटे से कम होती है, तो हृदय के स्वास्थ्य को कई नुकसान हो सकते हैं। इसलिए, आइए जानें कि यदि आप अपनी हृदय स्वास्थ्य को सुधारना चाहते हैं, तो आपको कितनी देर सोना चाहिए।

Heart Health: आजकल की आहार और जीवनशैली ऐसी हो गई है कि शरीर में कोई न कोई समस्या होती रहती है, और नींद की कमी हो जाती है, तो पुरुषों में अक्सर हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। इससे हृदय से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, और यह इन्सुलिन प्रतिरोध को भी बढ़ा सकता है। हाल के अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के बयान के अनुसार, वजन की बढ़ोतरी, मोटापा, उच्च ब्लड प्रेशर, ये सभी चीजें हैं जो हृदय स्वास्थ्य के जोखिम से जुड़ी होती हैं, और इन बीमारियों का मुख्य कारण नींद की कमी हो सकता है।

नींद हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी है। पर्याप्त नींद न लेने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें हृदय रोग भी शामिल है। पुरुषों के लिए, प्रति रात 7-8 घंटे की नींद लेना सबसे अच्छा है।

नींद की कमी से हृदय रोग का खतरा कैसे बढ़ता है?

नींद की कमी से निम्नलिखित कारक प्रभावित हो सकते हैं, जो हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं:

इंसुलिन प्रतिरोध: नींद की कमी से इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है। इससे हृदय रोग, मधुमेह और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।
शरीर में सूजन: नींद की कमी से शरीर में सूजन बढ़ सकती है। सूजन हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य पुरानी बीमारियों से जुड़ी है।
ब्लड प्रेशर: नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। उच्च रक्तचाप हृदय रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक है।
कोलेस्ट्रॉल: नींद की कमी से खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का स्तर बढ़ सकता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) का स्तर कम हो सकता है।
पुरुषों के लिए नींद की कमी को कैसे रोकें?

पुरुषों के लिए नींद की कमी को रोकने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:

- नियमित रूप से सोने और जागने का समय निर्धारित करें और उसका पालन करें।
- दिन के दौरान कैफीन और शराब का सेवन कम करें।
- अपने बेडरूम को अंधेरा, शांत और आरामदायक बनाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम करें, लेकिन सोने से पहले बहुत अधिक व्यायाम न करें।
- यदि आपको नींद की समस्या है, तो अपने डॉक्टर से बात करें।

जानिए की नींद की कमी के कारण कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं

बढ़ सकती है मोटापा की समस्या
दिल की बीमारी और नींद की कमी का कारण मोटापे का बढ़ना तय होता है, नींद की कमी के कारण व्यक्ति का वजन बढ़ने लग जाता है, इसके आलावा अपर्याप्त नींद विभिन्न मस्तिष्क प्रणालियों को भी क्षति पहुंचाने का काम करती है। इसलिए नींद की पूर्ती करना चाहते हैं तो कम से कम 8-10 घंटों के नींद की पूर्ती की आवश्य्कता होती है, पुरुषों को कोशिश करना चाहिए कि रोजाना 8 घंटे की नींद की पूर्ती तो अवश्य करें।

बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर
आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ ही पुरषों का ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ रहता है, वहीं ये समस्या जब ज्यादा होती है जब व्यक्ति नींद को पूरा नहीं करता है और कम से कम 6-7 घंटे सही से नहीं सोता है, अनिद्रा की कमी के कारण व्यक्ति चिड़चिड़ा सा रहता है , वहीं ये रक्तचाप के जैसी विभिन्न समस्या को भी बढ़ाते हैं। इसलिए व्यक्ति कम से कम से 6-7 घंटे नींद पूरी करने की जरूरत होती है।


जानिए नींद खराब होने की मुख्य कारण कौन-कौन से होते हैं
पुरषों में अक्सर नींद की पूर्ती की आवश्य्कता होती है, जो व्यक्ति कम से कम 6 घंटे से कम सोते हैं उनकी मृत्यु दर का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए कोशिश के कि लगभग 7-8 घंटे की नींद की पूर्ती जरूर करें, समय से सोएं व समय से उठें। वहीं कोशिश करें कि मोबाइल या लैपटॉप में ज्यादा देर तक काम न करें और सोने से पहले कभी भी कॉफी या चाय के सेवन को भी अवॉयड करें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।