
Congenital Glaucoma| image credit Grok
Congenital Glaucoma Symptoms in Hindi: बच्चे के जन्म के बाद अक्सर लोग बच्चे की बड़ी-बड़ी और चमकदार आंखें देखकर खुश हो जाते हैं कि बच्चे की आंख काफी बड़ी और सुंदर है। लेकिन अगर बच्चे की आंखों का साइज जरूरत से ज्यादा बड़ा दिख रहा है, तो यह कंजेनिटल ग्लूकोमा (Congenital Glaucoma) हो सकता है। इसे आम भाषा में काला मोतिया भी कहते हैं जो जन्म से या बचपन में ही हो जाता है।
इसमें आंख के अंदर का प्रेशर बढ़ जाता है, जिसकी वजह से आंख का काला हिस्सा (Cornea) फैलने लगता है और आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ता है। आइए आज के इस लेख में जानते हैं, अगर आप जल्द पैरेंट्स बने हैं या आपके घर में कोई छोटा बच्चा है, तो आप इसे कैसे पहचान सकते हैं कि उसे यह समस्या है या नहीं, जिससे सही समय पर डॉक्टर को दिखाकर इलाज हो सके।
इंस्टाग्राम चैनल thegymratmedico पर Dr. Bhavya Thareja द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो के अनुसार, कंजेनिटल ग्लूकोमा नवजात शिशुओं या छोटे बच्चों में होने वाली एक बीमारी है, जिसे जन्मजात काला मोतियाबिंद भी कहते हैं। यह जन्म के समय या उसके तुरंत बाद आंख की ड्रेनेज प्रणाली (Drainage System) के अविकसित होने के कारण होता है। इसमें आंख का दबाव (IOP) बढ़ जाता है, जिससे ऑप्टिक तंत्रिका (Optic Nerve) को नुकसान होता है और इलाज न होने पर स्थायी अंधापन हो सकता है।
जब बच्चे की आंख के अंदर लिक्विड का प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसकी आंख का बाहरी हिस्सा गुब्बारे की तरह फूलने लगता है। इसी बढ़ी हुई और उभरी हुई आंख को बुफ्थलमॉस कहते हैं। इसमें आंख का कोर्निया (Cornea) न केवल बड़ा हो जाता है, बल्कि प्रेशर की वजह से वह सफेद या धुंधला (Hazy) भी दिखने लगता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न कराया जाए, तो इससे बच्चे की देखने की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
सिर्फ आंखों का बड़ा होना ही ग्लूकोमा नहीं होता। अगर बड़ी आंखों के साथ ये 3 लक्षण दिखें, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं-
पैरेंट्स को ध्यान देना चाहिए कि अगर मोबाइल से फोटो खींचते वक्त बच्चे की आंखों के बीच में सफेदी या धुंधलापन दिख रहा है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। ग्लूकोमा से जो रोशनी एक बार चली जाती है, उसे वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए, इसे सिर्फ सुंदर आंखें समझकर घर पर न बैठें।
इसके अलावा अगर परिवार में पहले भी किसी को बचपन में यह बीमारी रही हो, तो बच्चे का चेकअप जन्म के तुरंत बाद जरूर कराएं, ताकि समय पर इलाज करके बच्चे की आंखों की रोशनी को सुरक्षित बचाया जा सके। याद रखें, आंखों के मामले में थोड़ी सी भी देरी बच्चे के पूरे भविष्य पर भारी पड़ सकती है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
03 May 2026 08:37 am
Published on:
03 May 2026 08:31 am
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