
घी, तेल, मक्खन व दूध के साथ शहद की अधिक मात्रा विष का काम करती है इसलिए इनके साथ न लें।
शहद का प्रयोग खानपान, उबटन में या कुछ आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल भी इसके साथ करते हैं। इसमें पोटेशियम, सोडियम, विटामिन-ए, बी, सी, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयोडीन व एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को ताकत देते हैं। लेकिन इसका प्रयोग करते समय ये ध्यान रखें-
घी, तेल, मक्खन व दूध के साथ शहद की अधिक मात्रा विष का काम करती है इसलिए इनके साथ न लें। चाय या कॉफी बनाते समय मिठास के लिए शहद न डालें। ज्यादा गर्म चीजें जैसे गर्म भोजन, पानी, दूध व तेज धूप में इसका प्रयोग न करें। शहद का इस्तेमाल कभी भी चीनी के साथ मिलाकर नहीं करना चाहिए। इससे सेहत को नुकसान पहुंचता है। खासकर पेन्क्रियाज की कार्यप्रणाली बिगड़ती है।
शहद शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डालता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आप उसका सेवन कैसे करते हैं। अगर शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पिया जाए तो उसका खून में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या पर लाभदायक असर पड़ता है। लाल रक्त कोशिकाएं मुख्य रूप से शरीर के विभिन्न अंगों तक खून में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। शहद और गुनगुने पानी का मिश्रण खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे एनीमिया या खून की कमी की स्थिति में लाभ होता है।
योग ग अभ्यासों को करने वाले लोगों के लिए शहद का सेवन रक्त के रसायन में संतुलन लाता है, इसलिए उन्हें खास तौर पर इसका सेवन करना चाहिए। शहद का नियमित सेवन शरीर को अधिक जीवंत बनाता है। सुबह अभ्यास शुरू करने से पहले गुनगुने पानी में थोड़ा सा शहद मिलाकर लेने पर शरीर सक्रिय हो जाता है। एक अनार का ताजा रस लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच शहद मिलाएं। रोजाना सुबह खाली पेट लें। खजूर में सुई चुभाते हुए उसमें छेद करें। उसे शहद में डुबा दें और दिन में दो बार 2-4 खजूर खाएं। ये दिल के लिए फायदेमंद होता है।
शंखपुष्पी के ये हैं फायदे
शंखपुष्पी में शंख के समान फूल दिखाई देने के कारण इसे यह नाम दिया गया। इसका प्रयोग शरीर को रिलैक्स करने के लिए होता है। साथ ही याददाश्त बढ़ाने वाली शंखपुष्पी को बुद्धिवर्धक भी कहते हैं। जानते हैं इसके फायदे-
ब्लड प्रेशर नियंत्रित : सूखी हुई शंखपुष्पी 250 ग्राम और जटामांसी 150 ग्राम लेकर दोनों को पीसकर चूर्ण बनाकर सुखा लें। अब 3-5 ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ लें। हाईबीपी की समस्या दूर होगी।
तेज होती जठराग्नि : इसके प्रयोग से भोजन को पचाने वाली पेट की अग्नि तेज होती है। कुष्ठ रोग के अलावा पेट में कीड़ों की समस्या का नाश कर पित्त की मात्रा को संतुलित करती है। मिर्गी रोग के उपचार में भी इसे काफी उपयोगी माना गया है।
Published on:
03 Oct 2017 01:14 pm
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