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Buerger Disease: युवाओं के लिए खतरे की घंटी! तेजी से फैल रही है बर्गर डिजीज, अभी जानें इसके लक्षण और बचाव?

Buerger Disease: बर्गर डिजीज (Buerger Disease) नाम सुनकर ही सोच रहे होंगे खाने का बर्गर? वास्तव में यह एक खतरनाक बीमारी है जो कम उम्र में धूम्रपान करने वाले युवाओं में ज्यादा देखने को मिलती है।

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भारत

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Nidhi Yadav

Jan 19, 2026

Buerger Disease

Buerger Disease (image- gemini)

Buerger Disease: आजकल बीमारियां इतनी बढ़ रही हैं कि नाम भी पता नहीं चलता है। ऐसे अजीब नामों से बीमारियां हो रही हैं कि समझ ही नहीं आता है कि यह किसी बीमारी का नाम है या कोई खाने की चीज! अब बर्गर डिजीज (Buerger Disease) को ही देख लो, इसका नाम सुनकर क्या आपको लग रहा है कि यह कोई बीमारी का नाम है? आइए जानते हैं कि यह बर्गर डिजीज (Buerger Disease) क्या होती है? इसके कारण और लक्षण क्या होते हैं? इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

क्या होती है बर्गर डिजीज (Buerger Disease)?

हम सब लोग तंबाकू और शराब के सेवन का मतलब कैंसर का कारण समझते हैं, लेकिन इसका एक और खतरनाक पहलू है बर्गर डिजीज (Buerger Disease)। चिकित्सा जगत में इसे 'थ्रोम्बोएंजाइटिस ओब्लिटरन्स' कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के अंगों में खून की सप्लाई को रोक देती है। यह बीमारी उन युवाओं में ज्यादा होती है जो कम उम्र में ही धूम्रपान करना शुरू कर देते हैं।

बर्गर डिजीज (Buerger Disease) के कारण?

  • नसों में सूजन आना
  • रक्त प्रवाह में रुकावट आना
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना

बर्गर डिजीज (Buerger Disease) के लक्षण क्या होते हैं?

  • हाथ-पैरों का ठंडा होना
  • त्वचा का रंग बदलना
  • चलने में दिक्कत होना
  • अंगों में झनझनाहट होना
  • बहुत लंबे समय में ठीक होने वाले घाव बनना

बर्गर डिजीज (Buerger Disease) से बचाव के उपाय?

  • तंबाकू का सेवन बंद करना
  • ठंड से बचकर रहना
  • नियमित रूप से व्यायाम करना
  • पैरों के घाव से बचने के लिए जूते पहनकर रखना

कितनी खतरनाक होती है बर्गर डिजीज (Buerger Disease)?

बर्गर डिजीज (Buerger Disease) की लास्ट स्टेज बहुत ज्यादा खतरनाक होती है जिसे 'गैंग्रीन' कहा जा सकता है। जब शरीर के अंगों में खून नहीं पहुंचता, तो वे अंग काले होकर सड़ने लगते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।