
Patrika dhyanshakti: मन को आराम देने की प्रक्रिया है ध्यान
ध्यान क्या है
केवल विचारहीन स्थिति या कुछ न सोचना ही ध्यान नहीं है। विचारों से परे जाना भी ध्यान है। आम दिनों में हर व्यक्ति के मन में करीब 70-75 हजार विचार आते हैं।
जरूरी क्यों
ज्यादा नकारात्मक बातें आने लगती हैं तो हम विचारों में जकड़ जाते हैं। अभी कोरोना से मृत्यु, उसका डर, तनाव आदि से निगेटिविटी बढ़ी है। जब हम इन्हीं विचारों के साथ सोते, उठते-बैठते हैं तो पर्याप्त नींद के बाद भी मन प्रसन्न नहीं रहता। मन को स्वस्थ-प्रसन्न रखने के लिए ध्यान जरूरी है।
ध्यान से मन को आराम
सोने या विश्राम से तन को आराम मिलता है। मन में हमेशा विचार चलने से उसे आराम नहीं मिलता है। ध्यान से मन को आराम मिलता है। ध्यान, मन को विचारों से परे ले जाता है। मन को आराम मिलता है। इसके बाद ही मन में पॉजिटिव विचार आते हैं। मन वह माध्यम है, जिससे सबकुछ जीता जा सकता है।
मनोदशा से बदलती है सांस की स्थिति
जब हम हंसते-रोते या फिर कुछ करते हैं तो उससे सांस की स्थिति भी बदलती है। जब हम तनाव में होते हैं तो सांस की स्थिति बदलने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है। इसी तरह पॉजिटिव रहने से शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। इसलिए प्रसन्न रहें।
ध्यान के दो प्रकार
पहला, जिसमें हम अपने को गुरु के हाथ में सौंप देते हैं। वह जैसा मार्गदर्शन करते हैं वैसे-वैसे हम करते हैं। दूसरा, हम सीखने के बाद खुद ही अभ्यास करते हैं। इसको भी दो तरह से कर सकते हैं। कोई एक मंत्र सुबह-शाम 108 बार जाप करें और दूसरा सेल्फ टॉक थैरेपी है।
बातें भूलें नहीं, परे जाएं
आप जिस चीज को भुलाना चाहते हैं तो वह बार-बार याद आती है। इसलिए विचार को भूलने की बजाय उससे दूर जाएं। आप जिस धर्म से आते हैं उसके किसी श्रेष्ठ मंत्र का जाप करें। इसको सुबह-शाम 108 बार जप करें। मन को आराम मिलेगा।
सेल्फ टॉक थैरेपी
इसमें रोज कम से कम दो मिनट खुद से पॉजिटिव बातें करें। इसमें भी दो मुद्राएं होती हैं। पहली, आंख बंद कर लें और तीन-चार बार लंबी सांस लें-छोडें़ फिर सांसों पर ध्यान लगाकर परमात्मा का धन्यवाद करें। दूसरी, दर्पण के सामने खड़े हो जाएं और परमात्मा से अनुरोध करें कि उनके गुण आप में आएं। हर दिन के लिए धन्यवाद दें।
आचार्य प्रतिष्ठा,वरिष्ठ योग एवं ध्यान विशेषज्ञ, नई दिल्ली
Published on:
23 May 2021 10:26 pm
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