11 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Nerve Pain vs Muscle Pain: शरीर में होने वाला दर्द नसों का है या मसल का? डॉक्टर से जानें कैसे करें पहचानें

Nerve Pain vs Muscle Pain: नर्व पेन और मसल पेन देखने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके कारण और लक्षण अलग होते हैं। जानें कैसे पहचानें, क्या कारण हैं और कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

Apr 11, 2026

Nerve Pain vs Muscle Pain

Nerve Pain vs Muscle Pain (Photo- gemini ai)

Nerve Pain vs Muscle Pain: अक्सर लोगों को दर्द तो महसूस होता है, लेकिन यह समझ नहीं आता कि यह मांसपेशियों (मसल) का दर्द है या नसों (नर्व) का। ऊपर से दोनों एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन असल में इनका कारण और इलाज बिल्कुल अलग होता है। अगर सही समय पर पहचान न हो, तो समस्या बढ़ भी सकती है। डॉ. राजू वैश्य बताते हैं कि नर्व पेन और मसल पेन को पहचानना जरूरी है ताकि सही इलाज मिल सके।

नर्व पेन कैसा होता है?

डॉ. वैश्य के अनुसार, नर्व पेन आमतौर पर तेज, जलन जैसा, बिजली के झटके जैसा या शूटिंग पेन होता है। यह अक्सर एक जगह से दूसरी जगह फैलता है, जैसे पीठ से पैर तक (सायटिका) या गर्दन से हाथ तक। इसके साथ कुछ और लक्षण भी दिख सकते हैं:

  • झनझनाहट (pins and needles)
  • सुन्नपन (numbness)
  • कमजोरी
  • किसी खास पोजीशन में दर्द बढ़ना

मसल पेन कैसा होता है?

वहीं, मसल पेन आमतौर पर हल्का-भारी, दर्द भरा या अकड़न जैसा महसूस होता है। यह एक ही जगह पर रहता है और अक्सर ज्यादा काम करने, गलत तरीके से बैठने या एक्सरसाइज के बाद होता है। इसके लक्षण होते हैं:

  • एक जगह दर्द या जकड़न
  • मूवमेंट करने पर दर्द बढ़ना
  • दबाने पर दर्द महसूस होना

दोनों में फर्क कैसे समझें?

सबसे बड़ा फर्क यह है कि नर्व पेन फैलता है और उसके साथ झनझनाहट या सुन्नपन होता है, जबकि मसल पेन एक ही जगह रहता है और ज्यादा मूवमेंट से बढ़ता है।

कारण क्या होते हैं?

डॉ. वैश्य बताते हैं कि नर्व पेन आमतौर पर नस दबने या डैमेज होने से होता है, जैसे स्लिप डिस्क (disc herniation), कार्पल टनल सिंड्रोम, डायबिटीज से जुड़ी नसों की समस्या शामिल है। वहीं मसल पेन के कारण होते हैं ज्यादा मेहनत या स्ट्रेन, गलत पोस्चर, एक्सरसाइज के बाद दर्द, हल्की चोट शामिल है।

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर दर्द 1-2 हफ्ते से ज्यादा बना रहे, बहुत तेज हो, या रोजमर्रा के काम में दिक्कत करे, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। खासकर दर्द का फैलना, सुन्नपन या झनझनाहट, कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी, पेशाब या पेट पर कंट्रोल न रहना (इमरजेंसी हो सकती है) जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत ध्यान दें।