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नाक में मौजूद बैक्टीरिया से बना नया एंटीबायोटिक, बीमारियों से बचाने में कर सकता है कमाल

जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी खोज की है! उन्होंने पहली बार, हमारे नाक से ही एक नया एंटीबायोटिक पदार्थ ढूंढ निकाला है. इसका नाम है 'एपिफैडिन'. ये पदार्थ एक खास तरह के बैक्टीरिया, 'स्टैफिलोकोकस एपिडर्मिडिस', से निकलता है. ये बैक्टीरिया हमारे नाक की अंदरूनी दीवारों पर पाए जाते हैं.

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New antibiotic found in human nose, could kill drug-resistant bacteria

जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी खोज की है! उन्होंने पहली बार, हमारे नाक से ही एक नया एंटीबायोटिक पदार्थ ढूंढ निकाला है. इसका नाम है 'एपिफैडिन'. ये पदार्थ एक खास तरह के बैक्टीरिया, 'स्टैफिलोकोकस एपिडर्मिडिस', से निकलता है. ये बैक्टीरिया हमारे नाक की अंदरूनी दीवारों पर पाए जाते हैं.

ये बैक्टीरिया एपिफैडिन का निर्माण करते हैं, जो कि एक नई तरह का एंटीबायोटिक है. ये सूक्ष्म जीवों को मारता है और इसका इस्तेमाल नई दवाइयां बनाने के लिए किया जा सकता है. 2016 में इसी टीम ने एक और अनजान एंटीबायोटिक, 'लुगडुनिन', की खोज की थी.

एपिफैडिन का इस्तेमाल क्यों जरूरी है?

दशकों से नए एंटीबायोटिक्स की खोज रुकी हुई थी, जबकि दुनियाभर में एंटीबायोटिक-रोधी बैक्टीरिया तेजी से फैल रहे हैं.
पुराने एंटीबायोटिक्स इन बैक्टीरिया पर असर नहीं करते, इसलिए नए उपचारों की जरूरत है.
एपिफैडिन खास क्यों है?

ये सिर्फ नाक के बैक्टीरिया को नहीं मारता, बल्कि आंत और फेफड़ों के बैक्टीरिया और कुछ फंगस पर भी असरदार है.
ये खासकर 'स्टैफिलोकोकस ऑरियस' नामक खतरनाक बैक्टीरिया पर काम करता है, जो अस्पतालों में होने वाले संक्रमणों का कारण बनता है.
एंटीबायोटिक्स के विपरीत, ये नाक के अन्य बैक्टीरिया को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता.
क्या एंटीबायोटिक बनकर आएगा एपिफैडिन?

अभी और शोध की जरूरत है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि एपिफैडिन या उसके बदले हुए रूपों का इस्तेमाल दवाइयों में किया जा सकता है.
शायद भविष्य में, एपिफैडिन बनाने वाले बैक्टीरिया को हमारे नाक में बढ़ाकर प्राकृतिक रूप से संक्रमणों को रोका जा सके.
यह खोज हमें उम्मीद देती है कि भविष्य में जीवाणुओं से होने वाले संक्रमणों का इलाज आसान हो जाएगा. वैज्ञानिकों का काम जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही हम एपिफैडिन का इस्तेमाल दवाइयों में कर पाएंगे.


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