
अमेरिका में एरिजोना विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक कोरोना के बाद होने वाली गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों, विशेष रूप से चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (irritable bowel syndrome), पर एक नया शोध कर रहे हैं। इस शोध में 9,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोरोना के बाद कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं और इससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभाव और उपचार क्या हैं।
इस शोध का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कोरोना संक्रमित होने के बाद लोगों में IBS (irritable bowel syndrome) और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों का खतरा कितना बढ़ जाता है और कोरोना के बाद होने वाले लक्षणों की गंभीरता पर पहले से मौजूद IBS का क्या प्रभाव पड़ता है।
IBS अमेरिका की 10-15 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करता है और इससे जीवन की गुणवत्ता काफी प्रभावित हो सकती है। IBS गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों के एक समूह का सबसे आम निदान है और यह माना जाता है कि यह आंत-मस्तिष्क की परस्पर क्रिया से संबंधित है।
IBS को कई बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ और वायरल संक्रमणों से भी जोड़ा गया है। एक तीव्र गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) संक्रमण के बाद IBS होने का जोखिम लगभग 9 प्रतिशत होता है।
शोध के अनुसार, कोरोना संक्रमण से दस्त, जी मिचलाना और उल्टी जैसे विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण (Gastrointestinal Diseases) होते हैं और 60 प्रतिशत से अधिक रोगियों में तीव्र गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण होने की सूचना है।
जुकरमैन कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ के डीन, डॉ. इमान हकीम ने कहा, "कोरोना के बाद होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं के बारे में जागरूकता कम हो गई है, क्योंकि महामारी कम हुई है, लेकिन फिर भी लाखों लोग इससे पीड़ित हैं।"
उन्होंने कहा, "CoVHORT शोध अध्ययन कोरोना के बाद होने वाले लक्षणों के बारे में जवाब ढूंढ रहा है। यह ज्ञान हम उपचार खोजने के लिए उपयोग कर सकते हैं। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की कार्रवाई है।"
Updated on:
30 Sept 2023 04:45 pm
Published on:
30 Sept 2023 04:44 pm
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