
Parkinson's patients may reach 3.15 million by 2033
Parkinson's disease : पार्किंसन रोग, एक गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी, दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। ग्लोबलडाटा की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में 2.64 मिलियन मामलों की तुलना में 2033 तक यह संख्या बढ़कर 3.15 मिलियन हो सकती है। इसके पीछे वार्षिक वृद्धि दर (एजीआर) 1.94% है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पार्किंसन रोग(Parkinson's disease) के सबसे ज्यादा निदान किए गए मामलों की संभावना है, जो 1.24 मिलियन तक पहुंच सकते हैं। वहीं, इटली में सबसे कम, लगभग 0.16 मिलियन मामलों का अनुमान है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित हैं। 2023 में इस आयु वर्ग के 90% से अधिक मामलों का निदान किया गया। वहीं, 18-39 वर्ष के आयु वर्ग में यह संख्या 1% से भी कम है।
पार्किंसन रोग (Parkinson's disease) मुख्य रूप से आंदोलन विकार के रूप में जाना जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में कंपन, मांसपेशियों की कठोरता और चलने-फिरने में कठिनाई शामिल हैं। यह बीमारी अल्जाइमर के बाद सबसे आम क्रॉनिक न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है।
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रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पुरुषों में इस बीमारी का प्रचलन महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक है।
फिलहाल, पार्किंसन (Parkinson's disease) का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, वर्तमान उपचार केवल लक्षणों को प्रबंधित करने में सहायक हैं, लेकिन बीमारी की प्रगति को रोकने या धीमा करने का तरीका अभी तक खोजा नहीं जा सका है।
ग्लोबलडाटा के वरिष्ठ महामारी विज्ञानी राहुल एन रवि के अनुसार, "पार्किंसन रोग (Parkinson's disease) वृद्ध आबादी को प्रभावित करने वाली सबसे आम क्रॉनिक बीमारियों में से एक है।" बढ़ती उम्रदराज आबादी वाले देशों को इस बीमारी की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य देखभाल में सुधार और बेहतर रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता होगी।
आने वाले 10 वर्षों में, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, ब्रिटेन और जापान जैसे देश पार्किंसन रोग (Parkinson's disease) के प्रभाव को सबसे अधिक महसूस करेंगे। इन देशों में बढ़ती वृद्ध आबादी के कारण इस बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ने की संभावना है।
पार्किंसन (Parkinson's disease) एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। इसका समाधान केवल बेहतर जागरूकता, शोध और वृद्ध आबादी के लिए समर्पित स्वास्थ्य सेवाओं के विकास से ही संभव हो सकता है।
Published on:
19 Nov 2024 10:38 am
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