
पेट में कीड़ों से भी होता गर्भवती को नाभि के पास दर्द
जयपुर। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा सॉइल ट्रांसमिटेड हेल्मिन्थ इन्फेक्शन (एसटीएच) भारत में हैं। इस कारण 1 से 14 वर्ष के 22 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा है। पोषक तत्वों की कमी से बच्चों के पेट में कीड़े होते हैं। होम्योपैथी में 5 से 12 साल की उम्र के बच्चों को पेट में कीड़े की आशंका रहती है।
नाभि के दर्द और सूजन का कारण
नाभि के दर्द का सबसे बड़ा कारण पाचन में गड़बड़ी होना होता है। इसके साथ निम्न समस्याएं हो जाती हैं। भोजन खत्म करने से पहले पूर्णता की एहसास, भोजन के बाद असुविधा, दर्द सिर्फ आपके नाभि के नजदीक नहीं, बल्कि आपकी छाती के नीचे भी है, जी मिचलाना आदि। यदि ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक रहते हैं तो चिकित्सक से परामर्श लें।
भूख नहीं लगती, चेहरे पर आते पीले धब्बे : बच्चों को दवा देकर कीड़ों से मुक्त करें। ऐसा न करने से बच्चों को पाचन संबंधी, अनियंत्रित भूख (भूख कभी कम-कभी ज्यादा लगना), चेहरे पर पीले धब्बे, चिड़चिड़ापन, मिर्गी जैसे लक्षण आ सकते हैं। बच्चों को इम्युनिटी बढ़ाने के लिए तीन महीने का होम्योपैथी कोर्स दिया जाता है। बच्चों को दो दिन में डीवॉर्मिंग में आराम मिलता है। गर्भवती महिलाओं में नाभि के आसपास दर्द और गुदा के पास खुजली होने पर डीवॉर्मिंग हो सकती है। होम्योपैथी में सुरक्षित इलाज संभव है। डॉक्टर से संपर्क करें।
कच्चा व आधा पका खाना : कच्चा व आधा पका खानाखाना भी पेट में दर्द का कारण होता है। अधपका खाना खाने से बचे, अधपकी रोटी पेट मैं जल्दी नहीं पचती है जो पेट दर्द का कारण हो सकती है । अकेले रहने वाले और स्टूडेंट में यह समस्या जादा देखने को मिलती है।
उबालकर पानी पीएं, बाहर के खाने से बचें : ताजा खाना खाएं। मीठा कम लें, पानी उबालकर ठंडा कर लें। इसके बाद छानकर पीएं। बाहर का खाना न खाएं। सलाद आदि खूब खाएं। साफ-सफाई रखें। होम्योपैथी इलाज लेते हुए चाय, कॉफी, चॉकलेट और आइसक्रीम से परहेज रखें। रात में अ'छी तरह से ब्रश करके सोएं।
डॉ. अमित खंडेलवाल,
होम्योपैथी विशेषज्ञ
जयपुर
Published on:
24 Oct 2018 05:24 pm
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