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आर2आर तकनीक से 93 साल के बुजुर्ग का घुटना प्रत्यारोपण

93 वर्षीय एक व्यक्ति के दोनों घुटनों में काफी तकलीफ रहती थी। 92वें वर्ष में उनकी हार्ट की सर्जरी भी हुई थी। इसलिए डॉक्टर घुटनों की सर्जरी की सलाह नहीं दे रहे थे। लेकिन आर2आर तकनीक से घुटनों की सर्जरी हुई। अब स्वस्थ्य हैं।

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आर2आर तकनीक से 93 साल के बुजुर्ग का घुटना प्रत्यारोपण,आर2आर तकनीक से 93 साल के बुजुर्ग का घुटना प्रत्यारोपण

क्या है नई तकनीक
तेज रिकवरी वाली सर्जरी के नाम से मशहूर आर2आर तकनीक में सर्जरी के दौरान दर्द नहीं के बराबर होता है। इस तकनीक से सर्जरी के 3 घंटे बाद ही मरीज चल सकता है। इस विधि से सर्जरी में न तो खून के बहाव को रोका जाता है और न ही लंबे समय तक के लिए बेहोशी का इंजेक्शन लगाया जाता है। इस सर्जरी में करीब 15-17 मिनट का ही समय लगता है।
अधिक उम्र में भी संभव
इस तकनीक से अधिक उम्र के लोगों में भी आसानी से सर्जरी की जा सकती है। इसमें चीरा छोटा लगता है इसलिए खून का बहाव भी बहुत कम होता है।
हड्डी में हल्का कट लगता
जटिल मरीजों में भी सर्जरी है आसान
पहले सर्जरी में मरीज को कैथेटर लगते हैं ताकि यूरिन निकलने में कोई दिक्कत न हो। ऐसे ही ïसर्जरी के पास एक पाइप (डे्रन पाइप) लगाते हैं ताकि पस या खराब खून बाहर निकले। कैथेटर और डे्रन ट्यूब से कई बार संक्रमण भी होता है। कैथेटर से यूटीआइ का खतरा रहता है लेकिन आर2आर तकनीक में इन पाइप की जरूरत नहीं है।
डॉ. धीरज मारोठी जैन, वरिष्ठ जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ, रेस नी क्नीनिक, अहमदाबाद