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Research: त्वचा रोग से पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है

Skin diseases may increase the risk of digestive problems : एक नई अध्ययन से पता चला है कि त्वचा संबंधी बीमारी एटोपिक डर्मेटाइटिस (एक्जिमा) से पाचन से संबंधित बीमारी इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।

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 Skin diseases may increase the risk of digestive problems

Skin diseases may increase the risk of digestive problems

Skin diseases may increase the risk of digestive problems : एक नई अध्ययन से पता चला है कि त्वचा संबंधी बीमारी एटोपिक डर्मेटाइटिस (एक्जिमा) से पाचन से संबंधित बीमारी इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।

जेएएमए डर्मेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन से पता चला है कि एटोपिक डर्मेटाइटिस (त्वचा संबंधी बीमारी) वाले वयस्कों में इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (पाचन से संबंधित बीमारी) का जोखिम 34 प्रतिशत बढ़ जाता है, वहीं बच्चों में यह 44 प्रतिशत बढ़ जाता है।

एटोपिक डर्मेटाइटिस एक पुरानी बीमारी है, जो त्वचा की सूजन, लालिमा और जलन का कारण बनती है। इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज में अल्सरेटिव कोलाइटिस (अल्सर) और सूजन आंत्र रोग शामिल हैं, जो पुरानी पाचन तंत्र की सूजन से जुड़े विकार हैं।

जबकि इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) आंत में स्थित है और एटोपिक डर्मेटाइटिस सूजन त्वचा को प्रभावित करती है, दोनों रोग प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा संचालित होते हैं और गंभीर सूजन द्वारा वर्गीकृत होते हैं।

अमेरिका में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के जोएल एम गेलफैंड ने कहा, "चिकित्सकों के लिए एटोपिक डर्मेटाइटिस के रोगियों की देखभाल के सर्वोत्तम मानक को समझना जरूरी है।"

उन्‍होंने कहा कि एटोपिक डर्मेटाइटिस और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज पुरानी सूजन और त्वचा और आंत बाधा में शिथिलता का कारण बन सकते हैं। विशिष्ट साइटोकिन्स, कुछ प्रकार के प्रोटीन भी होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि में भूमिका निभाते हैं।

टीम ने 1 मिलियन से अधिक बच्चों (1 वर्ष से कम उम्र से लेकर 18 वर्ष तक के प्रतिभागियों) और एटोपिक डर्मेटाइटिस (त्वचा संबंधी बीमारी) वाले वयस्कों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि त्वचा की स्थिति बच्चों में उच्च अल्सरेटिव कोलाइटिस से जुड़ी नहीं थी, जब तक कि बच्चों में एटोपिक डर्मेटाइटिस गंभीर मामला न हो।

हालांकि, एटोपिक डर्मेटाइटिस से पीड़ित बच्चों में सूजन आंत्र रोग का जोखिम 54 से 97 प्रतिशत तक बढ़ गया था। वहीं, गंभीर एटोपिक डर्मेटाइटिस से पीडि़त बच्‍चों में यह लगभग पांच गुना अधिक था।

इसके अलावा, एटोपिक डर्मेटाइटिस की सूजन वाले वयस्कों में अल्सरेटिव कोलाइटिस (अल्सर) का जोखिम 32 प्रतिशत और सूजन आंत्र रोग का जोखिम 36 प्रतिशत बढ़ गया था।

गेलफैंड ने कहा, ''त्वचा रोगों और अन्य रोगों के बीच संबंधों की जांच करने से न केवल इस बात की नई जानकारी मिलती है कि ये रोग दोनों के साथ एक रोगी को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि ये अध्ययन विशेष रूप से शक्तिशाली हैं क्योंकि वे प्रत्येक बीमारी कैसे असर करती है, इसकी जानकारी पर भी प्रकाश डालते हैं।''