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Retinal Diseases: आंखों की रोशनी बचाने की आ सकती है नई तकनीक! क्या भारतीय मरीजों को मिलेगा इसका फायदा

Retinal Diseases: RNA थेरेप्यूटिक्स आंखों की रोशनी बचाने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है। यह तकनीक जेनेटिक लेवल पर जाकर आंखों की बीमारियों का इलाज करने की क्षमता रखती है। आइए डॉक्टर सचित महाजन(नेत्र रोग विशेषज्ञ) से जानते है कि अपनी आंखों को इन बिमारियों से बचाने के लिए कौनसी टिप्स अपनाएं।

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भारत

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Nidhi Yadav

Apr 10, 2026

Retinal Diseases

Retinal Diseases (Image- gemini)

Retinal Diseases: National Library of Medicine के अनुसार RNA थेरेप्यूटिक्स आंखों की रोशनी बचाने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है। यह तकनीक जेनेटिक लेवल पर जाकर आंखों की बीमारियों का इलाज करने की क्षमता रखती है। हालांकि, भारत में इस तकनीक को पूरी तरह लागू करने के लिए अभी बड़े स्तर पर रिसर्च और डेटा (Cohort Study) की कमी है। अगर भारत अपने म्यूटेशन डेटा को मजबूत कर ले, तो लाखों लोग अंधेपन का शिकार होने से बच सकते हैं।

आइए डॉक्टर सचित महाजन (नेत्र रोग विशेषज्ञ) से जानते है कि अपनी आंखों को इन बीमारियों से बचाने के लिए कौनसी टिप्स अपनाएं।

क्या कहती है रिसर्च?

National Library of Medicine की एक रिसर्च के अनुसार Inherited Retinal Diseases (IRDs) के लिए RNA थेरेपी सबसे सटीक इलाज (Precision Medicine) मानी जा रही है। लेकिन भारत में अभी तक कोई ऐसी बड़ी कोहोर्ट स्टडी नहीं हुई है जिसमें कम से कम 500 मरीजों का डेटा शामिल हो। रिसर्च यह स्पष्ट करती है कि जब तक हमारे पास भारतीय मरीजों के जेनेटिक म्यूटेशन का बड़ा डेटाबेस नहीं होगा, तब तक हम उनके लिए सही और सटीक दवा तैयार नहीं कर पाएंगे।

क्या भारतीयों को मिलेगा इसका फायदा?

भारतीय आबादी का म्यूटेशन स्पेक्ट्रम विदेशी आबादी से अलग हो सकता है। इसका फायदा भारतीयों को मिल तो सकता है, लेकिन इसके लिए भारत को अपनी खुद की बड़ी रिसर्च की जरूरत है। अगर भारत में रिसर्च सफल होती है, तो भविष्य में यह महंगी तकनीक आम आदमी के लिए सस्ती हो सकती है। डेटा होने पर डॉक्टर यह जान पाएंगे कि किस मरीज पर कौन सी दवा असर करेगी।

क्या होती है Retinal Diseases?

रेटिना हमारी आंख के पीछे की एक पतली परत होती है जो रोशनी को सिग्नल में बदलकर दिमाग तक भेजती है, जिससे हम देख पाते हैं। रेटिनल बीमारियां वे समस्याएं हैं जो इस परत को नुकसान पहुंचाती हैं। इनमें से कई बीमारियां Inherited (अनुवांशिक) होती हैं, जो परिवार के जींस के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती हैं।

Retinal Diseases के कारण क्या होते है?

  • अनुवांशिकता (Genetics)।
  • उम्र के साथ रेटिना के सेल्स का कमजोर होना।
  • डायबिटीज।
  • हाई ब्लड प्रेशर।

Retinal Diseases के लक्षण क्या होते है?

  • दृष्टि का धुंधला होना।
  • रात के समय देखने में बहुत ज्यादा परेशानी होना (Night Blindness)।
  • सीधी लाइनें टेढ़ी या लहरदार दिखाई देना।
  • अचानक से आंखों की रोशनी का कम होना।
  • रंगों को पहचानने में दिक्कत आना।

Retinal Diseases से बचने के लिए टिप्स?

  • अपने आहार में नट्स और हरी सब्जियां शामिल करें।
  • अपनी आंखों को अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से बचाएं।
  • बीपी और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।
  • शराब और तंबाकू का सेवन न करें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।