
Road Hypnosis ( image- gemini AI)
Road Hypnosis: आज के नवजवान और नई पीढ़ी ने ड्राइविंग को अपना पैशन बनाया हुआ है। कहीं भी जाना हो, कैसा भी मौसम हो, कितनी भी दूरी हो, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें बस अपने शौक से मतलब होता है कि बस उनको गाड़ी चलानी है। ज्यादातर लोग तो उनमें ऐसे होते हैं जिन्हें यातायात के नियमों तक का नहीं पता होता है, तो उन्हें वाहन चलाने के दौरान होने वाले मानसिक रोगों के बारे में तो क्या ही पता होगा।
आपने कई रोड हादसे ऐसे देखे होंगे कि ड्राइवर नशे में भी नहीं था फिर भी गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई और बड़ा नुकसान हुआ। कई हादसे ऐसे होते हैं जिनमें ड्राइवर आगे वाली गाड़ी में टक्कर मार देते हैं। हम सबको लगता है कि ड्राइवर नशे में होगा या फिर उसको नींद आ गई होगी। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है, यह एक प्रकार की मानसिक समस्या मानी जाती है। अक्सर लंबे सफर पर ड्राइविंग के दौरान हमें याद नहीं रहता कि इतनी लंबी दूरी हमने कैसे तय की, यही होता है 'रोड हिप्नोसिस'। यह नींद की झपकी से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें ड्राइवर की आंखें तो खुली रहती हैं, लेकिन दिमाग सो जाता है। आइए जानते हैं कि यह क्या होता है? इसका कारण क्या है और इससे बचने का उपाय क्या है?
रोड हिप्नोसिस ऐसी मानसिक स्थिति होती है जिसमें इंसान अपने आप ही (जैसे हमारा मोबाइल प्लेन-मोड पर चला जाता है) ऑटो-पायलट मोड पर चला जाता है। विज्ञान का कहना है कि जब आप किसी सीधी और बिना ट्रैफिक वाली सड़क पर घंटों गाड़ी चलाते हैं, तो आपके दिमाग का चेतन हिस्सा (Conscious Mind) बिल्कुल सो जाता है। आप गाड़ी तो चला रहे होते हैं लेकिन आपको कुछ पता नहीं होता है। आपका दिमाग कुछ भी सुनने और समझने की अवस्था में नहीं होता है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 15 से 25 प्रतिशत रोड एक्सीडेंट्स का कारण यह मानसिक स्थिति ही होती है।
इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण मोनोटनी यानी उबाऊपन या एकरूपता को माना जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं:
1.सड़क पर कोई रुकावट नहीं होना।
2. लंबी यात्रा करना।
3. इंजन की आवाज का लोरी का काम करना।
4. जब आप गाड़ी में अकेले हों या जो साथ हो वह सो रहा हो।
5. बहुत ज्यादा थकान होना।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
07 Jan 2026 02:29 pm
Published on:
07 Jan 2026 02:28 pm
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