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सिर्फ 100 रुपये की गोली से होगा कैंसर का इलाज , टाटा इंस्टीट्यूट ने किया दावा

मुंबई का टाटा इंस्टीट्यूट, जो कैंसर (Cancer) रिसर्च और इलाज का जाना माना केंद्र है, दावा करता है कि उन्होंने कैंसर (Cancer) को दोबारा होने से रोकने वाली दवा खोज ली है। 10 साल की मेहनत के बाद शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने ऐसी गोली बनाई है, जो ना सिर्फ दूसरी बार कैंसर होने का खतरा कम करेगी बल्कि रेडिएशन और कीमोथेरेपी (Chemotherapy) जैसे इलाज के साइड-इफेक्ट्स को भी 50% तक घटा देगी।
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जयपुर

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Manoj Vashisth

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Updated: 28 Feb 2024, 11:27 AM IST

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Rs 100 Tablet May Reduce Side Effects of Cancer Treatment

मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट, जो भारत की एक प्रमुख कैंसर (Cancer) शोध और उपचार संस्था है, ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसा इलाज खोज लिया है जो कैंसर को दोबारा होने से रोक सकता है।

संस्थान के शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने 10 साल तक अध्ययन किया है और अब उन्होंने एक ऐसी गोली विकसित की है जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह:

- मरीजों में कैंसर Cancer) दोबारा होने से रोकेगी।
- विकिरण और कीमोथेरेपी जैसे उपचारों के दुष्प्रभावों को 50% तक कम कर देगी।

कैसे काम करती है ये गोली?

शोधकर्ताओं के अनुसार, मरने वाली कैंसर Cancer) कोशिकाएं छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं, जिन्हें क्रोमेटिन कण कहा जाता है। ये कण रक्तप्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में जा सकते हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को कैंसरग्रस्त कर सकते हैं।

इस समस्या का समाधान खोजने के लिए, शोधकर्ताओं ने चूहों को रेस्वेराट्रॉल और कॉपर (R+Cu) युक्त गोलियां दीं। R+Cu शरीर में ऐसे पदार्थ बनाते हैं जो क्रोमेटिन कणों को नष्ट कर देते हैं।

गोली के फायदे:

- डॉक्टरों का दावा है कि यह गोली कीमोथेरेपी (Chemotherapy) के दुष्प्रभावों को 50% तक कम कर सकती है।
- कैंसर Cancer) दोबारा होने की संभावना को 30% तक कम कर सकती है।
- यह अग्नाशय, फेफड़े और मुंह के कैंसर के लिए भी प्रभावी हो सकती है।
- इसकी कीमत सिर्फ ₹100 होगी।

अगला चरण:

- इस गोली को अभी खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से मंजूरी मिलने का इंतजार है।
-मंजूरी मिलने के बाद, जून-जुलाई से बाजार में उपलब्ध हो सकती है।
हालांकि, कैंसर को रोकने में असरकारिता की रोकथाम के दावे के लिए मानव परीक्षणों में अभी 5 साल लगेंगे।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।