
Snails Spreading Brain Disease Indian Study Warns Children at Risk
Brain disease in children : दक्षिण भारत में बच्चों को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी इओसिनोफिलिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (ईएम) घोंघों (Snails) के संपर्क से फैल रही है। यह बीमारी मृत्यु या दिमाग और तंत्रिकाओं को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। यह चेतावनी हाल ही में किए गए एक अध्ययन में सामने आई है।
ईएम (Eosinophilic Meningoencephalitis) एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिमाग और उसके आसपास के ऊतकों में सूजन हो जाती है। यह सूजन एक खास तरह की सफेद रक्त कोशिकाओं, जिन्हें ईोसिनोफिल कहते हैं, की वजह से होती है। यह बीमारी अक्सर परजीवी संक्रमणों, विशेष रूप से चूहे के फेफड़ों के कीड़े एंजियोस्ट्रॉन्जाइलस कैंटोनेंसिस से जुड़ी होती है, जो आमतौर पर घोंघों में पाया जाता है।
कोच्चि के अमृता अस्पताल द्वारा किए गए 14 साल के अध्ययन में घोंघों के संपर्क और ईएम के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध पाया गया है। अध्ययन में पाया गया कि जांच किए गए आधे से अधिक बच्चों का घोंघों (Snails) से सीधे संपर्क का इतिहास रहा है।
अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. केपी विनायण ने बताया, "पिछले एक दशक में, खासकर इस क्षेत्र में बच्चों में ईएम के मामले बढ़ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चों का इलाज शुरू में कई हफ्तों तक बैक्टीरियल, वायरल या तपेदिक मेनिनजाइटिस के रूप में किया गया था। संदिग्ध मामलों में जल्दी पहचान के लिए उचित जांच महत्वपूर्ण है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां यह बीमारी आम है।"
उन्होंने बताया, "यह संक्रमण गंभीर हो सकता है और इससे मृत्यु या दिमाग और तंत्रिकाओं को स्थायी नुकसान हो सकता है। यह खासकर उन बच्चों में ज्यादा पाया जाता है जो घोंघे वाले इलाकों में गंदगी और मिट्टी में खेलते हैं। घरों में साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखना और सलाद जैसी बिना पकाई सब्जियों को अच्छी तरह से धोना जरूरी है।"
अध्ययन के नतीजे स्वास्थ्यकर्मियों, अभिभावकों और नीति निर्माताओं के लिए इस उभरते खतरे से निपटने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
आमतौर पर लोग सीधे तौर पर या दूषित पानी और सब्जियों के सेवन से इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं। बच्चे घोंघों (Snails) से सीधे संपर्क में आने, दूषित भोजन खाने या संक्रमित लार्वा वाले खिलौनों से खेलने से भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। ये लार्वा आंत से मस्तिष्क तक जाकर ईएम का कारण बन सकते हैं।
अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, बिना धुली कच्ची सब्जियों वाला सलाद खाने और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं या खास खाने की आदतों के तहत मॉनिटर छिपकली, केकड़े, मेढक और झींगों का कच्चा मांस खाने से भी यह बीमारी फैल सकती है।
अध्ययन में शामिल डॉ वैशाख आनंद ने बताया, "हमारे अध्ययन से पता चलता है कि ईएम उतनी दुर्लभ नहीं है, जितना पहले सोचा जाता था। खासकर केरल में मानसून के बाद के महीनों में इसके मामले बढ़ जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि पिछले 1-2 दशकों में विशाल अफ्रीकी घोंघे (अचैटिना फुलिका) की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे इन घोंघों वाले इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए खतरा बढ़ गया है।"
Published on:
24 Feb 2024 11:51 am
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