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Nasal Spray Vaccine: एक स्प्रे से सर्दी-जुकाम, फ्लू और फेफड़ों के इंफेक्शन से बचाव? नई रिसर्च ने बढ़ाई उम्मीद

Nasal Spray Vaccine: वैज्ञानिकों ने बनाया यूनिवर्सल नेजल स्प्रे जो कई सांस की बीमारियों से बचा सकता है। जानिए कैसे काम करेगा यह नया मेडिकल इनोवेशन।

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भारत

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Dimple Yadav

Feb 20, 2026

Nasal Spray Vaccine

Nasal Spray Vaccine (Photo- gemini ai)

Nasal Spray Vaccine: क्या ऐसा हो सकता है कि एक ही नेजल स्प्रे (नाक में डालने वाला स्प्रे) आपको सर्दी-जुकाम, फ्लू और कई खतरनाक फेफड़ों के इंफेक्शन से बचा सके? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिक इसी दिशा में काम कर रहे हैं।

अमेरिका की Stanford University के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा खास नेजल स्प्रे विकसित करने का दावा किया है, जो भविष्य में कई तरह की सांस से जुड़ी बीमारियों से एक साथ सुरक्षा दे सकता है। इसे यूनिवर्सल वैक्सीन जैसा माना जा रहा है, क्योंकि यह किसी एक वायरस या बैक्टीरिया पर नहीं, बल्कि शरीर की इम्युनिटी को हर तरह के हमले के लिए तैयार करता है।

यह स्प्रे कैसे काम करता है?

साइंस पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों ने बताया कि अब तक बनने वाली ज्यादातर वैक्सीन एक खास वायरस या बैक्टीरिया को पहचानना सिखाती हैं। जैसे खसरा की वैक्सीन खसरे से बचाती है या कोविड वैक्सीन कोविड वायरस से। लेकिन यह नया नेजल स्प्रे अलग तरीके से काम करता है। इसे नाक के जरिए शरीर में डालने पर फेफड़ों में मौजूद इम्यून सेल्स, खासकर मैक्रोफेज, ज्यादा अलर्ट हो जाते हैं। यानी जैसे ही कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में घुसने की कोशिश करता है, ये सेल्स तुरंत हमला कर देते हैं। जानवरों पर किए गए परीक्षणों में देखा गया कि यह असर करीब 3 महीने तक बना रहा। इस दौरान फेफड़ों में पहुंचने वाले वायरस की संख्या 100 से 1000 गुना तक कम हो गई।

सिर्फ वायरस ही नहीं, बैक्टीरिया से भी सुरक्षा

वैज्ञानिकों ने पाया कि यह स्प्रे कुछ खतरनाक बैक्टीरिया से भी बचाव कर सकता है, जैसे Staphylococcus aureus और Acinetobacter baumannii, जो गंभीर फेफड़ों के संक्रमण का कारण बनते हैं और कई बार एंटीबायोटिक से भी ठीक नहीं होते।

अभी रिसर्च शुरुआती चरण में है

यह सुनकर उत्साहित होना स्वाभाविक है, लेकिन वैज्ञानिक अभी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। अभी तक यह स्प्रे सिर्फ चूहों पर टेस्ट किया गया है। इंसानों पर इसका असर कैसा होगा, यह जानने के लिए क्लिनिकल ट्रायल जरूरी हैं। भारत के Indian Council of Medical Research के विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों की इम्युनिटी बहुत जटिल होती है, इसलिए नतीजे अलग भी हो सकते हैं।

क्या कोई जोखिम भी है?

एक चिंता यह भी है कि अगर इम्यून सिस्टम को लगातार अलर्ट रखा जाए, तो वह जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो सकता है। इससे शरीर के स्वस्थ टिश्यू को नुकसान या सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

भविष्य में कैसे काम आ सकता है?

वैज्ञानिक मानते हैं कि यह स्प्रे पारंपरिक वैक्सीन की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनके साथ मदद करेगा। जैसे किसी नई महामारी की शुरुआत में, जब तक खास वैक्सीन नहीं बनती, तब तक यह स्प्रे लोगों को अस्थायी सुरक्षा दे सकता है। ठंड के मौसम में भी, जब सर्दी-खांसी और फ्लू ज्यादा फैलते हैं, तब इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।