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यूरिन रोक न पाने की समस्या में थैरेपी, व्यायाम और दवाओं से आराम

आंकड़ों की बात करें तो महिला-पुरुष का अनुपात 3: 1 का होता है। करीब 40 फीसदी तक भारतीयों में परेशानी देखने को मिलती है। इसमें मरीज हंसने, खांसने या छींकने से डरता है, क्योंकि इनसे से भी यूरिन लीक हो जाता है। सार्वजनिक स्थानों पर यूरिन लीक होने से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती है।

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यूरिन रोक न पाने की समस्या में थैरेपी, व्यायाम और दवाओं से आराम

यूरिन रोक न पाने की समस्या में थैरेपी, व्यायाम और दवाओं से आराम

हर उम्र के महिला-पुरुष में यूरिन लीक होने की समस्या हो सकती है। इसे यूरिन इंकंटीनेंस कहते हैं। आंकड़ों की बात करें तो महिला-पुरुष का अनुपात 3: 1 का होता है। करीब 40 फीसदी तक भारतीयों में परेशानी देखने को मिलती है। इसमें मरीज हंसने, खांसने या छींकने से डरता है, क्योंकि इनसे से भी यूरिन लीक हो जाता है। सार्वजनिक स्थानों पर यूरिन लीक होने से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती है।
नसों में कमजोरी भी कारण
अलग-अलग उम्र में इसके कारण भिन्न-भिन्न होते हैं। जैसे अधिक उम्र के पुरुष-महिलाओं में यूरिन से जुड़ी नसों का कमजोर होना, खराब लाइफस्टाइल, कब्ज, गर्भावस्था, मेनोपॉज, नशा, कैफीन डाइट अधिक लेना, यूरिन ट्रैक में ट्यूमर-गांठें, न्यूरोलॉजिकल डिजीज, प्रोस्टेट, प्रोस्टेट कैंसर, यूरिन ट्रैक में पथरी आदि।
बार-बार टॉयलेट जाना
इसकी लक्षणों की बात करें तो यूरिन पर कंट्रोल न होना, हंसने, खांसने, छींकने आदि पर भी यूरिन लीक हो जाना, बार-बार यूरिन के लिए टॉयलेट जाना पड़ता है, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ही यूरिन निकलना, यूरिन के लिए रात में बार-बार उठना भी पड़ रहा है। इससे नींद प्रभावित होती है।
योग-एक्सरसाइज से भी बचाव
वजन नियंत्रित रखें। नियमित पैल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करें। योग-प्राणायाम से भी फायदा मिलता है। वहीं दवाइयां से यूरिन को कंट्रोल किया जा सकता है। खट्टी चीजों को कम मात्रा में खाएं। रात में पर्याप्त नींद लें। दिनचर्या सही रखें। अधिक मात्रा में फाइबर डाइट लें। इससे कब्ज में राहत मिलती है।
बिहैवियरल थैरेपी महत्वपूर्ण
इसमें जरूरत अनुसार बिहैवियरल थैरेपी, व्यायाम और दवाइयां-सर्जरी करते हैं। शुरुआती स्टेज में बिहैबियरल थैरेपी से आराम मिलता है। इसमें यूरिन कंट्रोल करने के बारे में बताया जाता है। वहीं पैल्विक फ्लोर एक्सरसाइज से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। दवाइयों से यूरिन की तीव्र इच्छा नियंत्रित होती, फ्लो भी सही रहता है। वहीं पथरी, प्रोस्टेट आदि में सर्जरी करते हैं। जिनको इनसे राहत नहीं मिलती है उन्हें बोटोलिनम का इंजेक्शन ब्लैडर में लगाना पड़ता है। यह इंजेक्शन अब अपने देश में भी उपलब्ध है।
डॉ. संजय पाण्डेय, सीनियर यूरोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई