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सुबह नंगे पैर चलने से मिलेगा विटामिन N, जाने क्या होता है यह

क्या आप जानते हैं सुबह के वक्त नंगे पैर वॉक करने के कई फायदे हैं ।आपने अक्सर गार्डन में कई लोगों को नंगे पैर वॉक करते देखा होगा । तो क्या आपने कभी जानने की कोशिश की कि वे ऐसा क्यों करते हैं। आज हम आपको बताएंगे नंगे पैर चलने के क्या-क्या फायदे हैं।

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सुबह नंगे पैर चलने से मिलेगा विटामिन N, जाने क्या होता है यह

ये तो हम सभी जानते हैं कि नंगे पैर घास पर चलने से आंखों को फायदा होता है। इससे आंखों की रोशनी तेज होती है और कम नंबर का चश्मा भी उतर जाता है। घास के अलावा जमीन पर भी नंगे पैर चलने से शरीर में खास असर होता है। शोधकर्ताओं ने प्रकृति के जुड़ाव से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को विटामिन ‘एन’ नाम दिया है। जमीन पर नंगे पैर चलने से नहीं होगी हार्ट-बीपी की प्राब्लम। लंदन की वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार शहरों की तुलना में प्रकृति के संपर्क में पैदल चलने वालों में रक्तचाप और तनाव को नियंत्रित करने वाले हार्मोन ज्यादा संतुलित रहते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक मिट्टी में पाए जाने वाले कई लाभदायी बैक्टीरिया तनाव व अवसाद कम करते हैं व प्रतिरोधकक्षमता को बढ़ाते हैं। पैर चलने से पैरों को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है। इससे रक्तसंचार बेहतर होकर थकान कम होती है। साथ ही सभी मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं। पैर का निचला हिस्सा धरती के संपर्क में आने से धरती की ऊर्जा पूरे शरीर में संचारित होती है। इससे जोड़ों में दर्द, अनिद्रा व हृदय संबंधी समस्याओं पर अनुकूल असर पड़ता है व रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। एक शोध के अनुसार बगीचे या पेड़-पौधों की देखभाल में आधा घंटा बिताने से तनाव व अवसाद दूर होते हैं।

नंगे पैर चलने से शरीर में होती अर्थिंग

जिस तरह बिजली के तारों में अर्थिंग का सिद्दांत काम करता है वैसे ही हमारे शरीर में भी अर्थिंग का सिस्टम होता है. हमारे शरीर में कई तरह की इलेक्ट्रिकल तरंगे बनती हैं जो अंदरुनी तंत्र की क्रियाओं से जुड़ी होती हैं। कई शोधों से स्पष्ट हुआ है कि जमीन पर नंगे पैर चलने से शरीर की कई क्रियाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों ने इसे अर्थिंग सिद्धांत का नाम दिया है। यह सिद्धांत वैसे ही काम करता है, जैसे टेलीविजन केबल कंपनियां इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को स्थिर रखने के लिए जमीन की ‘अर्थिंग’ का प्रयोग करती हैं। हमारे शरीर की प्रकृति ‘बायो-इलेक्ट्रिकल’ है। यानी हमारे शरीर की सभी कोशिकाएं व तंत्रिका तंत्र एक प्रकार से भीतरी विद्युत शक्ति या ऊर्जा के स्पंदन से संचालित होते हैं। धरती अपने आप में ऊर्जा का भंडार है। वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती का ऊर्जा चक्र शरीर के विद्युत तंत्र पर भी अनुकूल-प्रतिकूल प्रभाव डालता है।