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क्या है चीन की रहस्यमय बीमारी व्हॉइट लंग सिंड्रोम, जानें लक्षण, कारण और बचाव

सर्दीयों में जब ठंडक अधिक बढ़ जाती है तो निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी भी अपने पैर पसारती है। 8 से 15 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में, इस रोग के वायरस तेजी से फैल सकते हैं, जिसे बचाव के लिए सतर्कता बरतना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम निमोनिया के कारण, लक्षण, और इससे बचाव के लिए आवश्यक उपायों की चर्चा करेंगे। बच्चों को इससे बचाने के लिए विशेषज्ञों की योजना और सावधानियों पर भी हम ध्यान देंगे।
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जयपुर

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Manoj Vashisth

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Updated: 18 Dec 2023, 12:39 PM IST

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White lung syndrome: China's new mysterious disease, what is the cause?

निमोनिया की वजह

इस समय वातावरण का तापमान भी कम हो जाता है। 8-15 डिग्री तक के तापमान में इसके वायरस तेजी से पनपते हैं। इस मौसम में प्रदूषण भी अन्य मौसम के मुकाबले ज्यादा होना भी नुकसानदायक है।

यह निमोनिया का ही एक गंभीर रूप है जिसमें फेफड़ों में जख्म हो जाते हैं। यह बीमारी खांसने, छींकने, बात करने, रोगी के पास गाना गाने से भी फैलती है। शुरुआती लक्षण कोरोना के जैसे सामने आ रहे हैं। यह बीमारी 3-8 वर्ष के बीच के बच्चों में हो रही है।

लक्षण
सबसे आम लक्षण खांसी, बुखार, बदन दर्द, थकान हैं। बच्चे की सांस नली में सूजन की तकलीफ और कफ का भी अनुभव हो सकता है। इसमें एक विशेष प्रकार का बलगम बन रहा है जो फेफड़ों और गले में होता है।


संभावित कारण

नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल के अनुसार कारकों में रोगाणु, प्रोटोजोआ, फंगस, बैक्टीरिया, वायरस या सिलिकोसिस हो सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि नई जाति के माइकोप्लाज्मा न्यूमोनी नामक ओर्गेनीजम से होता है जो संभवत: ज्यादा आक्रामक और एंटीबॉयोटिक रेजिस्टेंट होता है। इसका बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन, खानपान में बदलाव व प्रदूषण भी है। चीन के बाद यह बीमारी अब अमरीका के ओहियो, डेनमार्क और नीदरलैंड्स में भी फैल रही है।

गाइडलाइन

जरूरी टीकाकरण करवाएं। बीमार व्यक्ति से दूर रहें। रोग होने पर आइसोलेट हो जाएं। समय पर जरूरी टेस्ट कराएं।

क्यों यह नाम है

इसमें पूरे फेफड़ों पर सफेद धब्बे हो जाते हैं। इससे प्रभावित बच्चों में खांसी, बुखार और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों कहा है कि बच्चों को इसके प्रकोप से बचाने के लिए संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद लेने दें।

बचाव कैसे करें

नियमित रूप से हाथ धोएं, छींकने या खांसने के दौरान मुंह ढकने और बीमार होने पर घर पर रहकर भीड़-भाड़ से बचें। छुट्टियों के मौसम के आसपास होने वाली सभाओं में संक्रमित होने से बचने के लिए सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।

बच्चों में ही क्यों?

बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए ये बीमारी बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है। लेकिन इसका मतलब ये भी कतई नहीं कि सिर्फ बच्चों पर ही इसका अटैक होगा, जिसकी भी इम्युनिटी कमजोर है, वो इस बीमारी के चपेट में आ सकता है।

- डॉ. रमेश जोशी, सीनियर फिजिशियन

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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