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Sleep Divorce Trend: क्या है स्लीप डिवोर्स? जानिए क्यों कपल्स अपना रहे हैं ये नया ट्रेंड

Sleep Divorce Trend: स्लीप डिवोर्स का नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें कपल्स बेहतर नींद के लिए अलग सोने का फैसला लेते हैं। जानिए इसके कारण, फायदे और रिश्तों पर इसका असर।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 09, 2026

Sleep Divorce Trend

Sleep Divorce Trend (photo- gemini ai)

Sleep Divorce Trend: हाल ही में नींद से जुड़े एक सर्वे में सामने आया कि भारत में भी यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार आधे से ज्यादा भारतीय कपल्स कभी-कभी अलग सोना पसंद करते हैं ताकि उन्हें अच्छी और पूरी नींद मिल सके।

क्या होता है स्लीप डिवोर्स?

स्लीप डिवोर्स का मतलब है कि पति-पत्नी या पार्टनर जानबूझकर अलग सोते हैं। यह हमेशा के लिए जरूरी नहीं होता। कुछ कपल्स हफ्ते के दिनों में अलग सोते हैं और वीकेंड पर साथ सोते हैं। इसका मकसद सिर्फ अच्छी नींद लेना होता है, न कि रिश्ते में दूरी बनाना। नींद के विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल लोग अपनी हेल्थ को ज्यादा महत्व देने लगे हैं। इसलिए अगर एक ही बेड पर सोने से नींद खराब होती है, तो लोग अलग सोने का विकल्प चुन लेते हैं।

कपल्स अलग क्यों सोने लगे हैं?

खर्राटे और नींद की समस्या- अगर किसी एक पार्टनर को ज्यादा खर्राटे आते हैं या नींद से जुड़ी समस्या है, तो दूसरे की नींद बार-बार टूट सकती है।

अलग-अलग सोने का समय- आजकल कई लोगों की दिनचर्या अलग होती है। कोई देर रात तक काम करता है या मोबाइल चलाता है, तो कोई सुबह जल्दी उठ जाता है। इससे एक-दूसरे की नींद प्रभावित हो सकती है।

कमरे का तापमान और माहौल- कई कपल्स में कमरे के तापमान, लाइट या गद्दे को लेकर भी अलग-अलग पसंद होती है, जिससे सोने में परेशानी हो सकती है।

काम और लाइफस्टाइल का दबाव- लंबे समय तक काम करना, बच्चों की जिम्मेदारी और डिजिटल स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल भी नींद को प्रभावित कर सकता है।

नींद की कमी से हो सकते हैं ये नुकसान

डॉक्टरों के मुताबिक अगर लंबे समय तक नींद पूरी न हो तो इसका असर सेहत पर पड़ता है। इससे दिल की बीमारी, मोटापा, डायबिटीज और मानसिक तनाव का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही नींद की कमी रिश्तों को भी प्रभावित कर सकती है। जब नींद पूरी नहीं होती तो इंसान ज्यादा चिड़चिड़ा हो सकता है, जिससे छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगते हैं।

क्या अलग सोना हमेशा सही है?

हालांकि स्लीप डिवोर्स हर कपल के लिए सही नहीं होता। कुछ लोगों को अलग सोने से अकेलापन महसूस हो सकता है। साथ सोने से कई बार भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ता है, जैसे सोने से पहले बात करना या एक-दूसरे के करीब होना। इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कपल्स अलग सोने का फैसला लेते हैं तो उन्हें पहले खुलकर बात करनी चाहिए। साथ ही सोने से पहले कुछ समय साथ बिताना भी जरूरी है। आखिर में सबसे जरूरी बात यह है कि हर कपल का रिश्ता अलग होता है। किसी के लिए साथ सोना बेहतर हो सकता है, तो किसी के लिए अलग सोना। असली मकसद यह होना चाहिए कि नींद भी अच्छी हो और रिश्ता भी मजबूत बना रहे।